बरेली। डीडीपुरम स्थित कुष्ठ आश्रम की भूमि पर स्मार्ट सिटी मिशन के तहत विकसित किए जा रहे फूड कोर्ट प्रोजेक्ट की जांच शासन के आदेश पर एडिशनल कमिश्नर प्रीति जायसवाल करेंगी। इस परियोजना में लगभग 3.02 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता, सरकारी धन की क्षति और स्ट्रीट वेंडरों के अधिकारों के हनन के गंभीर आरोप लगे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के राज्य मिशन निदेशक (स्मार्ट सिटी मिशन) ने नगर विकास विभाग के निर्देश पर मंडलायुक्त एवं अध्यक्ष बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड से पूरे प्रकरण की बिंदुवार जांच कर स्पष्ट संस्तुति सहित विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। यह कार्रवाई व्यापार मंडल की शिकायत के बाद की जा रही है।
परियोजना को लेकर शुरुआत से ही कई तरह के विवाद जुड़े रहे हैं। नगर निगम की इस बेशकीमती जमीन पर पहले फड़ विक्रेताओं को जगह देने का प्रस्ताव पारित हुआ था। बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने 5 नवंबर 2024 को ''''''''एड टेक प्रिंट एंड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड'''''''' के साथ मल्टी लेवल कार पार्किंग, फूड कोर्ट परिसर और लाइट एंड साउंड शो के संचालन के लिए 15 साल का अनुबंध कर लिया।
महज चार से पांच लाख रुपये सालाना के इस ठेके पर आपत्तियां उठीं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जहां बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होनी है, वहां अग्नि सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। परियोजना के मूल उद्देश्य को भटकाने के भी आरोप लगे हैं। जिस परिसर को खानपान और स्ट्रीट वेंडरों को व्यवस्थित स्थान देने के लिए करोड़ों की लागत से तैयार किया गया था, वहां अब रेडीमेड गारमेंट शोरूम संचालित करने की तैयारियां चल रही हैं।
वर्जन :
शासन से पत्र प्राप्त हुआ है। फूड कोर्ट मामले की जांच एडिशनल कमिश्नर को सौंपी गई है। जांच पूरी होने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। - भूपेंद्र एस चौधरी, मंडलायुक्त