नगर पंचायत, शेरगढ़ के सदस्यों की शिकायत पर वहां के चेयरमैन बुद्धसैन मौर्य की कुर्सी हिल गई है। सदस्यों की शिकायत के बाद जांच में वित्तीय अनियमितताएं मिलने पर जिलाधिकारी संजय कुमार ने शासन को रिपोर्ट भेजकर चेयरमैन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की संस्तुति की है। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) और उपजिलाधिकारी बहेड़ी की जांच आख्या रिपोर्ट के मुताबिक शेरगढ़ के चेयरमैन ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं किया। उनके खिलाफ नगर पालिका अधिनियम की 1916 की धारा 48(2) के तहत की कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इसके तहत चेयरमैन के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार भी सीज हो सकते हैं।
ये आरोप सही निकले
1. नगर पंचायत शेरगढ़ की गाटा संख्या-570 राजस्व अभिलेखों में मरघट के नाम अंकित है। बोर्ड की बैठक के प्रस्ताव संख्या-10 के मुताबिक इसकी बाउंड्रीवाल बरामदा पंचायत निधि से बनाया गया है और शवदाह गृह सांसद निधि से बना है। शमशान भूमि की शेष भूमि अतिक्रमण मुक्त है। जबकि नगर पंचायत के प्रस्ताव के मुताबिक मरघट के पूर्ण क्षेत्रफ ल की बाउंड्री ही नहीं कराई गई।
2. नगर पंचायत की भूमि श्रेणी-4 पर इरशाद खां और जद्दो द्वारा किया गया अतिक्रमण एक साल पुराना है। अतिक्रमण को हटाने में नगर पंचायत ने लापरवाही की है। जबकि पूर्व अध्यक्षा सबीना अंसारी के कार्यकाल में अवैध निर्माण को ध्वस्त करा दिया गया था।
3. काजी हाउस शेरगढ़ की वर्षों पुरानी आबादी में स्थित है। अवैध कब्जेदार धर्मवीर और हरीश कुमार का मकान शेरगढ़ और काबरखास की सीमा से 95 मीटर दूरी पर स्थित है। जबकि काबरखास की सीमा से काजी हाउस 230 मीटर दूरी पर है जिसके कारण अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
4. 13वें वित्त आयोग और अवस्थापना निधि की स्वीकृत योजना के अंतर्गत सफाई उपकरणों को यूपी एग्रो से क्रय न किए जाने की शिकायत है। आख्या के अनुसार सफाई उपकरणों को क्रय करने के लिए आमंत्रित निविदा में यूपी एग्रो ने भाग नहीं लिया था। जिसके कारण न्यूनतम निविदादाताओं से सफाई उपकरण क्रय किए गए। इससे साफ जाहिर होता है कि यूपी एग्रो से उपकरण खरीदने को एप्रोच ही नहीं की गई। यह शासनादेशों का खुला उल्लंघन है।
5. 19 जुलाई 2012 को बैठकें आहूत की गई थीं। आठ मार्च 2014 को आहूत बैठक कोरम पूरा न होने की वजह से निरस्त हो गई थी। बैठक प्रत्येक माह होनी चाहिए, लेकिन नहीं की गई हैं।