पशुओं को कैनाइन पारवो वायरस, पीपीआर, एफएमडी के उन्मूलन में कारगर होने की जताई उम्मीद, पशु कल्याण में उत्कृष्ट कार्य पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईवीआरआई को सराहा
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में ईजाद तीन आधुनिक स्वेदशी वैक्सीन बुधवार को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 97वें स्थापना दिवस समारोह में रिलीज हुई। जो संस्थान के वैज्ञानिकों के नवाचार का प्रतीक है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट, सचिव देवेश चतुर्वेदी, उप महानिदेशक डॉ. संजय गर्ग, डॉ. पुनीत अग्रवाल, डॉ. राघवेंद्र भट्टा, आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय फार्माकोपिया मानकों पर प्रमाणित ये वैक्सीन विदेशी टीकों पर निर्भरता को खत्म कर आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक हैं। कार्यक्रम में आईवीआरआई की विकसित तकनीकी का प्रदर्शन भी किया गया।
साथ ही, सूकर की शंकर लैंडली प्रजाति, इंडिमस चूहों की अंतः प्रजनित प्रजाति, जीवित क्षीणित पीपीआर गोटपॉक्स संयुक्त टीका का आईसीएआर ने प्रमाणिकरण किया। प्रदर्शनी में आईवीआरआई की संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. रूपसी तिवारी, डॉ. एमके सिंह अन्य लोग मौजूद रहे। ब्यूरो
ये वैक्सीन हुईं रिलीज
1- नेगेटिव मार्कर ट्राइवेलेंट खुरपका-मुंहपका टीका : पहला ऐसा वैकल्पिक टीका है जो संक्रमित एवं टीकाकृत पशु में विभेद की क्षमता से लैस है। यह भारतीय एफएमडी वायरस उपभेदों (ओ, ए, एशिया-1) को शामिल कर विशिष्ट गैर-संरचनात्मक प्रोटीन विलोपन तकनीक पर बना है।
2- पुनः संयोजित पीपीआर मार्कर टीका : जुगाली करने वाले पशुओं को घातक विषाणुजनित रोग से बचाव के लिए पुनः संयोजित मार्कर टीका है, जो टीकाकृत और संक्रमित पशु में बनी एंटीबॉडीज में विभेद करता है। ये तकनीक रोगमुक्त क्षेत्र घोषित करने की प्रक्रिया में प्रमाणिकरण करेगा।
3- सजीव तनुकृत कैनाइन पारवो वायरस सेल कल्चर टीका : ये टीका कुत्तों को पारवो वायरस संक्रमण से बचाव के लिए बना है। जो भारतीय कैनाइन वायरस स्ट्रेन से सेल कल्चर तकनीक से बना है। ये किफायती, सुरक्षित, प्रभावी और विदेशी वैक्सीन पर निर्भरता पर अंकुश लगाएगा।