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उपलब्धि: आज नई दिल्ली में रिलीज होगी स्वदेशी कैनाइन पारवो वैक्सीन, आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने की है ईजाद

Mon, 07 Jul 2025 02:04 AM IST
बरेली ब्यूरो अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, आईसीएआर के उच्चाधिकारी इस टीके को रिलीज करेंगे टीका। स्वदेशी स्ट्रेन की वैक्सीन वर्ष 2022 में बनकर तैयार हुई थी। 
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IVRI Bareilly - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जानलेवा संक्रामक बीमारी कैनाइन पारवो वायरस से कुत्तों को बचाने के लिए बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों द्वारा ईजाद स्वदेशी वैक्सीन सोमवार को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में आयोजित कार्यक्रम में रिलीज की जाएगी। पांच साल शोध के बाद वर्ष 2022 में पुराने और नए स्ट्रेन को निष्क्रिय करने वाली वैक्सीन बनाने में वैज्ञानिकों ने सफलता हासिल की थी। इसका पेटेंट फाइल किया जा चुका है। 

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आईवीआरआई पशु रोग शोध एवं निदान केंद्र (कैडरेड) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विशाल चंद्र ने वर्ष 2017 में वैक्सीन के लिए शोध शुरू किया था। उन्होंने बताया कि धारणा थी कि एक बार वैक्सीन लगने के बाद कुत्तों में कैनाइन पारवो वायरस से पीड़ित होने की आशंका नहीं होती, मगर शोध के दौरान पता चला कि वैक्सीनेशन के बावजूद कुत्ते इस जानलेवा वायरस की चपेट में आ रहे हैं। वायरस के म्यूटेशन यानी स्वरूप परिवर्तन की वजह से ऐसा हो रहा था। 

लिहाजा, पुराने और नए दोनों स्ट्रेन को निष्क्रिय करने वाली वैक्सीन ईजाद करने का निर्णय लिया। शुरुआत संक्रमित कुत्तों से वायरस लेकर आइसोलेशन से हुई और सेल कल्चर आधारित वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया पूरी की गई। 

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सीपीसीएसईए से अनुमति के बाद कुत्तों पर परीक्षण 
वैक्सीन का प्रभाव आंकने के लिए कुत्तों पर टेस्ट करना जरूरी था। लिहाजा कमेटी फॉर द परपज ऑफ कंट्रोल एंड सुपरविजन ऑफ एक्सपेरिमेंट ऑन एनिमल (सीपीसीएसईए) से अनुमति ली गई थी। वर्ष 2021-22 में क्रमवार तीन बार परीक्षण किया, जो सफल रहा। बताया कि पारवो वायरस सर्वाधिक संक्रामक है। 

संक्रमित कुत्ते का मल सूंघने से दूसरे कुत्ते भी चपेट में आ जाते हैं। सही इलाज नहीं मिलने पर संक्रमित कुत्ते की मौत तय है, क्योंकि यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से कम करता है। भूख कम लगती है और वजन घटता है। रक्त और प्रोटीन के आंतरिक रिसाव से मौत की आशंका रहती है। वैक्सीन ही इसका कारगर इलाज है। इससे बचाव के लिए पिल्लों का टीकाकरण बेहद जरूरी है।

आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि वायरस के स्वरूप परिवर्तन की वजह से पुरानी वैक्सीन निष्प्रभावी हो रही थी। लिहाजा, भारतीय स्ट्रेन से कैनाइन पारवो वैक्सीन ईजाद की गई, जो बेहद कारगर है। इसे सोमवार को केंद्रीय कृषि मंत्री रिलीज करेंगे। पेटेंट फाइल कर चुके हैं। 
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