सीपीसीएसईए से अनुमति के बाद कुत्तों पर परीक्षण
वैक्सीन का प्रभाव आंकने के लिए कुत्तों पर टेस्ट करना जरूरी था। लिहाजा कमेटी फॉर द परपज ऑफ कंट्रोल एंड सुपरविजन ऑफ एक्सपेरिमेंट ऑन एनिमल (सीपीसीएसईए) से अनुमति ली गई थी। वर्ष 2021-22 में क्रमवार तीन बार परीक्षण किया, जो सफल रहा। बताया कि पारवो वायरस सर्वाधिक संक्रामक है।
संक्रमित कुत्ते का मल सूंघने से दूसरे कुत्ते भी चपेट में आ जाते हैं। सही इलाज नहीं मिलने पर संक्रमित कुत्ते की मौत तय है, क्योंकि यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से कम करता है। भूख कम लगती है और वजन घटता है। रक्त और प्रोटीन के आंतरिक रिसाव से मौत की आशंका रहती है। वैक्सीन ही इसका कारगर इलाज है। इससे बचाव के लिए पिल्लों का टीकाकरण बेहद जरूरी है।
आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि वायरस के स्वरूप परिवर्तन की वजह से पुरानी वैक्सीन निष्प्रभावी हो रही थी। लिहाजा, भारतीय स्ट्रेन से कैनाइन पारवो वैक्सीन ईजाद की गई, जो बेहद कारगर है। इसे सोमवार को केंद्रीय कृषि मंत्री रिलीज करेंगे। पेटेंट फाइल कर चुके हैं।