बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय को मिले ए प्लस प्लस ग्रेड पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता जितेंद्र पटेल की ओर से राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद के निदेशक से शिकायत दर्ज कराई गई है। इसमें दावा किया गया है कि विश्वविद्यालय ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह उच्च ग्रेड हासिल किया है।
शिकायतकर्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय ने 21 दिसंबर 2022 को एसएसआर जमा किया था। आरोप है कि एसएसआर में कई फर्जी दस्तावेज शामिल थे। शिकायतकर्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय 85 पाठ्यक्रमों के संचालन का दावा करता है, जबकि एसएसआर (सेल्फ स्टडी रिपोर्ट) में 77 पाठ्यक्रम ही दर्ज हैं। इन 77 में से 15 से अधिक पाठ्यक्रम फर्जी बताए गए हैं।
कहा कि इंजीनियरिंग विभाग में एकीकृत पीजी और पीएचडी कार्यक्रम न तो चल रहे हैं और न ही एआईसीटीई से स्वीकृत हैं। 10 साल से बंद प्री-डॉक्टोरल (एमफिल) कार्यक्रमों को भी जारी बताया गया है। विश्वविद्यालय में यूजीसी के निर्धारित शिक्षक-छात्र अनुपात का भी पालन नहीं किया जा रहा है। शिक्षकों की संख्या छात्रों की संख्या से काफी कम है।
शिकायतकर्ता ने शिकायत में 10 पोस्ट-डॉक्टोरल कार्यक्रम (जैसे डीएससी, डीलिट, एलएलडी) का भी उल्लेख किया है। ये कार्यक्रम न तो चल रहे हैं और न ही उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 21(3) के तहत स्वीकृत हैं। इसी तरह आठ पीजी डिप्लोमा, चार डिप्लोमा और चार प्रमाणपत्र या जागरूकता कार्यक्रम भी बिना आवश्यक सरकारी मंजूरी के संचालित बताए गए हैं।
वर्जन :
नैक की कमेटी के माध्यम से ही विश्वविद्यालयों को ग्रेडिंग मिलती है। इस कमेटी में संबंधित विश्वविद्यालय के लोग नहीं होते। कड़े मानकों को पार करने के बाद ही किसी विश्वविद्यालय को नैक ए प्लस प्लस ग्रेडिंग मिलती है। इस तरह के आरोपों का कोई आधार नहीं है। - डॉ. विनय वर्मा, मीडिया प्रभारी, रुहेलखंड विश्वविद्यालय