खरीद-फरोख्त करती है सरगना बबली खान उर्फ नेहा यादव
बबली खान ने स्वीकार किया कि वही इस गिरोह की सरगना है। कम उम्र की लड़कियों को खरीदकर उनसे देह व्यापार कराती है। रिया से उसने पीड़ित किशोरी को खरीदा था। उसके गिरोह के सदस्यों के काम भी बंटे हुए हैं। बबली ग्राहकों से सौदा तय करती है। लड़की को स्कूटी से लाने-ले जाने का काम विनोद, खलील खान, जसलीन व दुर्गावती का होता है। ये लोग लड़की को बीच में बैठाकर बाइक चलाते हैं ताकि वह भाग न सके। एसपी सिटी ने बताया कि बबली का असली नाम नेहा यादव है। खलील से निकाह के बाद उसने नाम बदल लिया है। विनोद ने आधार कार्ड में हेरफेर कराई थी।
इंस्टाग्राम से पसंद कराते थे लड़की, व्हाट्सएप कॉल पर तय होता था भाव
किशोरी ने अधिकारियों को बताया कि विनोद यादव उसे चनेहटी के कमरे में बंधक बनाकर रखता था। बबली उसकी व अन्य लड़कियों की तस्वीर इंस्टाग्राम व टेलीग्राम जैसे अकाउंट पर ग्राहकों को भेजती थी। फिर उनके रूप-रंग के आधार पर व्हाट्सएप कॉल पर सौदा तय होता था। तय रकम एडवांस लेकर उनको ग्राहकों को सौंप देते थे और खुद बाहर पहरेदारी करते थे। पता लगा कि जालंधर की मूल निवासी जसलीन बिजनौर में आकर बस गई है। वह भी बबली की सहयोगी है और लड़कियां सप्लाई करती है। नेपाल की दुर्गावती जरूरतमंद थी। उसे जसलीन ने ही बबली के गिरोह में शामिल कराया था।
कई होटलों में हो रहा देह व्यापार
अधिकारियों ने आरोपियों से पूछताछ की तो पता लगा कि सेटेलाइट का होटल मूडी मून, लिटिल क्राउन, पीलीभीत बाइपास का ग्रीन एप्पल होटल व मामा-भांजा रेस्टोरेंट समेत कई अन्य होटल वालों से देह व्यापार रैकेट संचालकों की मिलीभगत है। चिह्नित होटलों में गिरोह के लोग बेरोकटोक तरीके से आवागमन करते हैं। यहां घंटों के हिसाब से कमरा मिल जाता है। नाबालिगों के कागजात भी गंभीरता से चेक नहीं किए जाते हैं।
यही वजह रही जो उम्र और लंबाई में बेहद छोटी वाराणसी निवासी किशोरी को फर्जी आधार कार्ड से बालिग बनाकर पेश किया गया और होटल प्रबंधन ने जांच की जरूरत नहीं समझी। सीओ तृतीय ने बताया कि असली आधार कार्ड में पीड़िता की जन्मतिथि 2011 है, जबकि धंधेबाजों ने उसकी जन्मतिथि 2007 दर्शाकर फर्जी आधार कार्ड बनवा लिया था। होटल लिटिल क्राउन के संचालक भाग गए हैं। अन्य चिह्नित होटलों के संचालकों की भी तलाश की जा रही है।