बिलसंडा में बस में बैठे एक बच्चे की मौत जैसे हुई है अगर उसे हादसा कहा जाएगा तो शायद न्याय नहीं होगा। जिस गाड़ी में बच्चाें को लादकर स्कूल से घर और घर से स्कूल लाया ले जाया जाता था उसमें कई कमियां थीं। इसकी फिटनेस वर्ष 2013 में अपनी वैधता पूरी कर चुकी थी। इसका पंजीकरण शाहजहांपुर में होने के बावजूद भी इसका नंबर उत्तराखंड से यूपी का नहीं किया गया।
हादसा होने के बाद यह बस किसी दिशा ट्रैवल्स एजेंसी बरेली की बताई जा रही थी। लेकिन जब आरटीओ बरेली आरआर सोनी से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि यह गाड़ी उत्तराखंड में खरीदी गई थी। इसे यूपी में बेचा गया तो 26 सितंबर 2011 को इसे परमिट दिया गया। वाहन स्वामी कैलाश मैनाली बताए जा रहे हैं जो पारजोई प्रथम, शाहजहांपुर के रहने वाले हैं। आरटीओ ने बताया कि इसका परमिट वर्ष 2016 तक का है।
आरटीओ विभाग की ओर से न तो कभी चेकिंग दल में इसे पकड़ा गया और न ही नंबर बदले जाने जैसी स्थिति को गंभीरता से लिया गया। 2013 में फिटनेस प्रमाण पत्र देने के बाद गाड़ी दो साल में इतनी कंडम हो गई इससे साफ है कि फिटनेस भी जुगाड़ से लिया गया। गाड़ी कंडम थी तो इसे आरटीओ फिटनेस में नकार देते। इसलिए वाहन मालिक ने रिमोट इलाके में लगा दिया।
- फिटनेस में होता है खेल
आरटीओ विभाग की ओर से वाहनाें का फिटनेस हमेशा सवालाें के घेरे में रहा है। अमर उजाला ने आठ जनवरी 2015 के अंक में दलालाें द्वारा फिटनेस किए जाने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। यहां दलाल ही वाहनाें के फिटनेस कर रहा था।