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सिस्टम बेहाल- खूनी मोड़ हर मौत पर शहर को रहा झकझोर

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बरेली। सिस्टम इस कदर बेहाल हो चुका है कि पीलीभीत रोड पर मयूर वन चेतना केंद्र के पास स्थित खूनी मोड़ सिर्फ अफसरों की फिक्र तक सीमित रह गया है। वर्ष 2017 में यहां युवा नेता युवराज सिंह की मौत हुई तो कमिश्ननर, पीडब्ल्यूडी, क्रेडाई ने इस पर लंबी प्लानिंग की। कई दिन अफसर एवं समाज के जिम्मेदार लोगों ने दौड़ लगाई। हादसे रोकने के लिए बड़ी-बड़ी बातें हुईं, लेकिन यह प्लान कागजों तक ही सीमित रह गए। यही कारण है कि यह खूनी मोड़ लगातार लाडलों की जिंदगी निगल रहा है। गुरुवार को यहां एक व्यापारी के बेटे की जान चली गई। मगर अफसर हैं कि सिर्फ बातों और प्लान बनाने में ही उलझे हैं। जिसके चलते दो साल पहले हुई प्लानिंग अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।
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10 जुलाई 2017 की रात युवा कारोबारी एवं नेता युवराज सिंह परिवार के साथ एक पार्टी से घर लौट रहे थे। पीलीभीत रोड पर मयूर वन चेतना केंद्र के पास उनकी कार एक अन्य कार से टकरा गई। इस हादसे में युवराज सिंह की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया। इसके बाद डेथ प्वाइंट बन चुके इस खूनी मोड़ को दुरुस्त करने की कवायद शुरू हुई। जिम्मेदारी पीब्डब्ल्यूडी को दी गई। तत्कालीन चीफ इंजीनियर राकेश राजवंशी ने यहां चौड़ीकरण का प्रस्ताव तैयार कराया, लेकिन डीपीआर तैयार होने के बाद फाइल आगे नहीं बढ़ी।
आगे नहीं बढ़ा कमिश्नर का प्रोजेक्ट
पीडब्ल्यूडी के बाद कमिश्नर ने यहां हवाईअड्डे को देखते हुए रोड चौड़ीकरण और रोटरी बनवाने का प्लान बनवाया। यह प्रोजेक्ट भी करीब डेढ़ करोड़ का था लेकिन आगे नहीं बढ़ सका।
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क्रेडाई का प्लान बीच में लटका
युवराज रियल एस्टेट कारोबारी थे, लिहाजा क्रेडाई ने इस मोड़ को संभालने का बीड़ा उठाया। प्लान हुआ कि चौड़ीकरण पीडब्ल्यूडी कराएगा लेकिन संकेतक क्रेडाई लगवाएगा। यहां करीब 25-30 संकेतक की आवश्यकता थी लेकिन चार संकेतक लगने के बाद यह प्रक्रिया भी थम गई।
सड़क निर्माण में भी तकनीकी खामी
जब भी कोई सड़क का निर्माण होता है तो वहां वाहनों की गति के अनुसार मोड़ पर सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जाती है। पीलीभीत रोड पर मयूर वन चेतना केंद्र के पास तीव्र मोड़ है और यहां सड़क का चौड़ीकरण नहीं किया गया है। इसके चलते तेज रफ्तार होने पर विपरीत दिशाओं से आने-वाले वाहन सामने आ जाते हैं और फिर हादसा होता है। आसपास के लोगों का कहना है कि यह मोड़ इतना तीव्र है कि अगर यहां हादसा होता है तो मौत भी होती ही है।

सो रहा है सिस्टम! पैरेंट्स ही रोकें युवाओं को ढाबों पर ‘लेट नाइट पार्टी’ से
बरेली। पीलीभीत रोड पर मयूर वन चेतना केंद्र के पास बने डेथ प्वाइंट पर हादसों का एक बड़ा कारण आसपास के ढाबों पर होने वाली ‘लेट नाइट पार्टी’ भी हैं। शहर से दूर होने के कारण यहां ढाबों पर मिलने वाली सुविधाएं और छूट युवाओं को आकर्षित करती हैं। ‘लेट नाइट पार्टी’ के बाद जब उसके सुरूर में झूम रहे युवा तेज रफ्तार वाहनों से शहर की ओर फर्राटा भरते हैं तो इस खूनी मोड़ को भूल जाते हैं और हादसे का शिकार होते हैं।
युवराज की मौत के बाद जब अभियान चलाया गया तो इन ढाबों पर सख्ती की बात हुई। आरटीओ को यहां से अतिक्रमण हटवाने को भी पत्र लिखा गया। मगर परिवहन विभाग की मेहरबानी से यहां सड़क किनारे खड़े होने वाले वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसका कारण भी यहां के ढाबे हैं, जिन पर सारी सुविधाएं मुहैया हो जाती हैं और पुलिस सबकुछ जानकर भी अनजान बनी रहती है। इसीलिए यह ढाबे शौकीन युवाओं के लिए ‘लेट नाइट पार्टी’ का ठिकाना बन चुके हैं। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि युवाओं पर ध्यान रखें।

नाइट पार्टियां ज्यादातर लोग शहर के बाहर ही करते हैं। पीलीभीत मार्ग का चौड़ीकरण धीमी गति से हो रहा है। इससे मयूर वन चेतना केंद्र मोड़ पर हादसे हो रहे हैं। संबंधित विभाग हादसे रोकने के लिए योजनाएं बनाकर उन पर अमल कराए। - दिनेश गोयल, आईआईए

स्मार्ट सिटी बनने से शहर और बढ़ेगा। लेट नाइट पार्टियां लोग शहर से अलग करते हैं। सड़कों पर यातायात सुविधाएं पर्याप्त नहीं होने से कई हादसे हो चुके हैं। इस पर कार्ययोजना जरूरी है। - घनश्याम खंडेलवाल, उद्यमी

लोक निर्माण विभाग और प्रशासन की लापरवाही से सड़क हादसे हो रहे हैं। बार-बार ऐसा होने पर भी कोई कार्ययोजना नहीं बनी है। सिविल एन्क्लेव शुरू होते ही यातायात और बढ़ेगा। - अवधेश अग्रवाल, व्यापारी नेता
शहर का विस्तार हो रहा है। लेट नाइट पार्टियों का चलन बढ़ रहा है। खूनी मोड़ खत्म करने को कार्ययोजना बनाने की कई बार घोषणा तो हुई, लेकिन प्रशासन और संबंधित विभागाें ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। - दुर्गेश खटवानी, दवा कारोबारी
अफसरों की बात
परिवार रखे नजर, नाबालिग न दौड़ाएं वाहन
नाबालिगों और नौजवानों को कार, बाइक देने से पहले परिवार के लोगों को भी सोचना चाहिए। बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखनी होगी। बालिग युवाओं को भी सुरक्षित ड्राइविंग के बारे में बताया जाए। इसके लिए पुलिस ही नहीं परिवार और समाज भी जवाबदेह बने।
- अविनाश चंद्र, एडीजी जोन
फिर बनेगी प्रोजेक्ट रिपोर्ट
सेटेलाइट से हवाईअड्डा तक सड़क फोरलेन बनेगी, इसमें यह मोड़ भी शामिल है। इस प्रोजेक्ट के लिए वन विभाग से जमीन भी ली जाएगी। निर्माण खंड के एक्सईएन बीएम शर्मा से मैंने इस प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने को कहा है। बीच में सड़क पर ढाई मीटर चौड़े डिवाइडर भी बनेंगे।
- प्रमेश गुप्ता, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
पीडब्ल्यूडी को सड़क का चौड़ीकरण कराना था लेकिन उसे नहीं कराया गया। वहां पर अतिक्रमण हटवाना भी जरूरी है और 25-30 संकेतक लगाने की आवश्यकता है। पूर्व में हमने चार संकेतक लगवाए भी थे। क्रेडाई आज भी वहां की दिक्कतें दूर करने के लिए मदद को तैयार है।
- रमनदीप सिंह, क्रेडाई अध्यक्ष

मेरा बेटा तो चला गया, दूसरी अनहोनी से पहले इंतजाम करे प्रशासन
बरेली। गुरुवार रात बर्थ-डे पार्टी करके लौट रहे कपड़ा व्यापारी गुरुदीप सिंह के बेटे लवजोत की पीलीभीत रोड के खूनी मोड़ पर कार पलटने से मौत हो गई। उसके एक साथी आदित्य की हालत गंभीर है। शुक्रवार को कपड़ा व्यवसायी के घर और पोस्टमार्टम हाउस पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। गुरुदीप सिंह ने बताया कि अचानक आए मोड़ पर ब्रेक लगाने से अनियंत्रित होकर कार पलटी थी। पहले भी यहां हादसों में कई लोगों की मौत हो चुकी है। भविष्य में इस तरह के हादसे न हों, इसकी प्रशासन को व्यवस्था करनी चाहिए।
कटरा मानराय में गुरुकृपा टेक्सटाइल शोरूम के मालिक कृष्णावटी कॉलोनी निवासी व्यापारी गुरुदीप सिंह के परिवार में मातम पसरा है। गुरुदीप का हाल ऐसा था कि पोस्टमार्टम हाउस जाने को दिल ने गवाही नहीं दी। जवान बेटे के शव का हश्र उनसे देखा नहीं जा रहा था। घर पर सैकड़ों लोगों ने आकर उन्हें सांत्वना दी। देर शाम संजयनगर श्मशान भूमि पर लवजोत का अंतिम संस्कार कर दिया गया। लवजोत के बहनोई गौरव महेंद्रू ने बताया कि कार में लवजोत पीछे बैठा था। जिस साइड में था, उधर का शीशा खुला था। एक्सीडेंट के बाद उसका सिर बाहर निकलने की वजह से कार से दब गया। काश, शीशा बंद होता तो दूसरे साथियों की तरह वह भी बच जाता। लवजोत का बड़ा भाई गुरुेंद्र पिता के साथ कारोबार में हाथ बंटाने के साथ पढ़ाई करता है तो बहन तान्या दिल्ली में स्टूडेंट है।
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