बरेली। रामपुर में सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमले के पांच आरोपी 12 साल से बरेली सेंट्रल जेल में बंद थे। शुक्रवार का दिन इनके लिए काफी अहम था। रामपुर कोर्ट ने फैसला सुनाया तो इनमें से दो आरोपियों को बरी कर दिया गया। इनमें बहेड़ी का गुलाब खान और प्रतापगढ़ का मोहम्मद कौसर है। देर शाम आरोपियों को लेकर गारद जेल लौट आई। गुलाब की रिहाई का आदेश जारी होने से उसके परिवार में खुशी का माहौल है।
रामपुर के सीआरपीएफ सेंटर पर 31 दिसंबर 2007 की रात में आतंकियों ने हमला कर दिया था। आतंकी गेट नंबर एक से घुसे थे। उन्होंने गेट पर मौजूद जवानों पर एके 47 से गोलियां बरसाई थीं। परिसर में काफी अंदर तक जाकर हैंड ग्रेनेड फेंके थे। हमले में सीआरपीएफ के सात जवान शहीद हो गए थे। गेट के बाहर रिक्शा में सो रहे चालक की भी मौत हो गई थी। घटना में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आठ लोगों को संदेह में पकड़ा था। इनमें पाक अधिकृत कश्मीर निवासी इमरान शहजाद, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का मोहम्मद फारूख, प्रतापगढ़ का मोहम्मद कौसर, बरेली के बहेड़ी कस्बे का गुलाब खां पुत्र शमशेर खां, बिहार का सबाउद्दीन पुत्र शब्बीर अहमद, मुंबई गोरेगांव निवासी फहीम अंसारी, मुरादाबाद के गांव मिलक कामरू निवासी जंग बहादुर बाबा और रामपुर का मोहम्मद शरीफ शामिल थे। पुलिस ने इन्हें दस फरवरी 2008 को कोर्ट में पेश किया। वहां से गुलाब, कौसर, शरीफ, जंगबहादुर और फहीम को बरेली सेंट्रल जेल भेजा गया। कुछ आरोपी लखनऊ जेल भेजे गए।
रामपुर में कोर्ट की कार्रवाई के लिहाज से पांचों आरोपियों को शुक्रवार सुबह सघन सुरक्षा में रामपुर ले जाया गया। वहां तीन आरोपियों को दोषी मानकर गुलाब और कौसर को दोषमुक्त कर दिया गया। इस दौरान गुलाब का परिवार भी कोर्ट के बाहर मौजूद रहा। परिवार ने बताया कि रिहाई का परवाना जारी हुआ है, शनिवार को रिहाई संभव है।
रामपुर हमले के आरोपी करीब 12 साल से यहां बंद थे। इनमें से दो को दोषमुक्त करने के फैसले की जानकारी हमें भी मिली है। हालांकि अभी कोर्ट से रिहाई का परवाना नहीं आया है। कोर्ट के फैसले का पालन करते हुए आदेश मिलते ही रिहाई कर दी जाएगी।
अशोक कुमार सागर, अधीक्षक सेंट्रल जेल