जोगराजपुर (पीलीभीत)। सांड़ से बचने के चक्कर में गांव गढ़ाकलां निवासी लालाराम (64) कुएं में गिर गए। इसमें उनकी मौत हो गई। बुजुर्ग को कुएं से निकालने का प्रयास करते वक्त गांव के ही रामनरेश भी कुएं में फंस गए और उनकी हालत बिगड़ गई। बाद में ग्रामीणों ने मशक्कत कर दोनों को बाहर निकाला। सेहरामऊ उत्तरी पुलिस ने बुजुर्ग के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
हादसा सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के गांव गढ़ाकलां में बृहस्पतिवार सुबह करीब सवा सात बजे हुआ। बुजुर्ग लालाराम गांव के बाहर पत्नी रामकली के साथ रहते थे। उनके तीन पुत्र रामपाल, प्रभुदयाल, कामता प्रसाद दूसरे मकान में गांव के भीतर की तरफ रहते हैं। बृहस्पतिवार सुबह लालाराम अपने बड़े पुत्र रामपाल के घर दूध लेने जा रहे थे। रास्ते में एक सांड़ दौड़ता हुआ आ रहा था। सांड़ को अपनी तरफ आता देख लालाराम बचने के लिए किनारे होने लगे और पास के ही कुएं में गिर गए। 50 मीटर गहरे कुएं में गिरने के बाद लालाराम को बचाने के लिए काफी ग्रामीण जमा हो गए। सांड़ को दूसरी तरफ भगा दिया गया। इसके बाद गांव के ही रामनरेश रस्सी के सहारे कुएं में उतरने लगे। इस बीच कुएं के भीतर पहुंचने पर उनका दम घुटने लगा। जिसके बाद ग्रामीणों ने उनको बमुश्किल बाहर किया। बाद में सूचना फायर ब्रिगेड और पुलिस को दी गई, लेकिन इससे पहले ही ग्रामीणों ने दोनों को बाहर निकाल लिया। बुजुर्ग की मौत हो चुकी थी। बुजुर्ग की मौत से परिवार में चीख पुकार मच गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के तीन बेटे और छह विवाहित पुत्रियां हैं।
आवारा पशुओं को लेकर प्रशासन संजीदा नहीं
पूरनपुर। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से लावारिस पशुओं को आश्रय देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जिले में भी पशु आश्रय केंद्र बनाने के लिए बड़ी रकम खर्च की जा चुकी है। पशुओं को आश्रय गृह तक पहुंचाने के लिए टीमें बनाकर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं, लेकिन यह सब सिर्फ कागजों में पूरा होता दिखाई दे रहा है। आलम यह है कि सिस्टम के जिम्मेदार आंकड़ेबाजी का खेल करने से बाज नहीं आ रहे। सड़कों पर पशुओं की भरमार है और आश्रय केंद्र सूने पड़े हैं। आए दिन पशु हमला कर किसी की जान ले रहे हैं तो कइयों को घायल किया जा चुका है। फसलें भी खराब हो रही हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अफसर संजीदगी से कार्रवाई नहीं कर पा रहे। न तो पशुओं को सुरक्षित किया जा सका है, न ही ग्रामीणों को। सीएम की सख्ती के बाद भी जिले में हालात को बदला नहीं जा सका है। अधिकारी सिर्फ खुद की ओर से किए गए कागजी प्रयासों को गिनाते हुए पीठ थपथपा रहे हैं। हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाकों में हालात बदतर होते जा रहे हैं। पूर्व में भी बिलसंडा, न्यूरिया, बरखेड़ा, माधोटांडा समेत कई ग्रामीण इलाकों में आवारा पशुओं से हादसे सामने आते रहे हैं।
केस एक:
ग्राम हुसैनापुर निवासी नवनीत शुक्ला पेट्रोल पंप पर मैनेजर थे। मार्च माह में वह पंप से काम निपटाकर घर जा रहे थे। रास्ते में सांड़ से बाइक टकराने से उनकी मौत हो गई थी।
केस दो:
बरेली-बीसलपुर मार्ग पर 21 अगस्त 2018 को बीसलपुर कोतवाली क्षेत्र के भड़रिया मोड़ के पास सांड़ से टकराकर पिकअप पलट गई थी। हादसे में लखीमपुर खीरी जिले के दो मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।