माधोटांडा (पीलीभीत)। खेल खेल में बच्चे ‘अथर्व’ की जान चली गई। माता-पिता के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। उन्हें अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि घर के बाहर खड़ा आइसक्रीम का ठेला उनके बच्चे के लिए काल साबित होगा। लेकिन वह अपने बच्चे की गतिविधियों पर ध्यान देते तो शायद खतरे से उसे आगाह कर देते। यह हादसा अन्य अभिभावकों के लिए नसीहत है। आप अपने ‘अथर्व’ पर नजर रखें।
कलीनगर कस्बे में हुआ हादसा बेहद दुखद है। पड़ोसी और रिश्तेदार ही नहीं, पूरे कस्बे के लोग इसको सुनकर आहत दिखाई दिए। परिवार को ढांढस भी दिलाया जाता रहा। बताते हैं कि तबीयत खराब होने के चलते किराना व्यापारी अजय गुप्ता (बच्चे के पिता) सोमवार को दुकान नहीं गए और घर पर आराम करते रहे। सुबह करीब साढ़े दस बजे अथर्व घर के बाहर खेलने चला गया। पिता आराम कर रहे थे, मां बंटी गुप्ता मंदिर गईं थी। इस बीच कब वह आइसक्रीम के फ्रीजर में खेलते-खेलते छिपने चला गया, किसी को पता भी नहीं लगा। घंटों बाद जब उसकी तलाश शुरू की गई। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अब उसकी मौत के बाद परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
इन सबके बीच हादसा दूसरे माता-पिता के लिए एक नसीहत भी दे गया है। उनको अपने कामकाज के साथ ही घर या फिर बाहर खेलने के लिए निकले बच्चों के प्रति संजीदा रहना चाहिए। अधिक समय बाद जब वह वापस न आए तो उनको समय-समय पर बाहर जाकर देखते रहना चाहिए। ताकि वह क्या कर रहे हैं? कैसे हैं, इसका पता समय रहते लगता रहे।
काश ! उसे स्कूल भेज दिया होता..
कलीनगर कस्बे में मासूम के साथ हुए हादसे के बाद हर तरफ इसी की चर्चाएं होती रहीं। जिसने भी सुना वह पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के लिए पहुंच गया। वहीं परिजन का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
किराना व्यापारी अजय गुप्ता के दो बेटे हैं। मृतक उनका छोटा बेटा था और पूरनपुर के एक निजी स्कूल में नर्सरी का छात्र था। एक दिन पूर्व रविवार को अथर्व के उंगली मेें चोट लग गई थी। इस वजह से सोमवार को परिवार वालों ने उसको स्कूल नहीं भेजा। हर कोई यही कहता रहा कि काश...अथर्व को स्कूल भेज दिया होता।
बच्चे जो देखते हैं वही करने लगते हैं, लिहाजा सावधानी जरूरी
बच्चों में स्वाभाविक चपलता होती है। वह किसी भी जगह ज्यादा देर नहीं ठहर पाते हैं। बच्चे जो देखते हैं, वही सीखने लगते है और उसे करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में उनके साथ हादसे हो जाते हैं। अमूमन घरों में बच्चे बिजली के स्विच खोलते-बंद करते हैं। फ्रिज में बच्चों के बंद हो जाने की भी देश में कई घटनाएं प्रकाश में आई हैं। खुद को छिपाने के लिए बच्चे ऐसा स्थान तलाशते हैं, जहां कोई उन्हें ढूंढ न सके और इसी प्रयास में उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है। माता-पिता को चाहिए कि वह खेलते समय बच्चों पर पूरी नजर रखें। उन्हें कोई भी ऐसा काम करने पर टोकें जरूर, जिससे बच्चे को खतरा हो। बच्चा अगर घर या बाहर खेलते समय आधा घंटे तक नजरों से ओझल हो जाए तो उसकी तलाश जरूर करें और यह देखें कि वह क्या कर रहा है।
- डॉ. सत्येंद्र नारायण, प्राचार्य-साइकोलॉजिस्ट, उपाधि महाविद्यालय
फ्रिज में शून्य हो जाता है ऑक्सीजन का स्तर
फ्रिज में अब आमतौर पर हाइड्रो क्लोरो फ्लूरो कार्बन गैस होती है। यह बेहद ज्वलनशील होती है। फ्रिज में जब इस गैस का इस्तेमाल होता है तो उसमें ऑक्सीजन का स्तर शून्य हो जाता है। जाहिर सी बात है कि जब बच्चा फ्रिज में बंद हुआ होगा तो उसे ऑक्सीजन नहीं मिली होगी और दम घुटने से उसकी मौत हो गई होगी।
- डॉ. मनोज गुप्ता, केमिस्ट्री प्रवक्ता उपाधि महाविद्यालय