बरेली। गली नवाबान स्थित लखनऊ ड्रग एजेंसी के मनोज कुमार खंडूजा के मामले की जांच में नया मोड़ आ गया है। उनके भांजे के मेडिकल स्टोर के नाम से 600 टेबलेट नकली एलेग्रा-120 एमजी की बिक्री का बिल काटे जाने की बात सामने आई है। उधर, पूर्व में हुई शिकायत पर बुधवार को कमिश्नर ने सहायक आयुक्त औषधि को तलब किया। प्रकरण को समझकर उचित कार्रवाई करने की चेतावनी दी।
पिछले महीने आगरा के बंसल, हे मां मेडिकल एजेंसी और अन्य से शहर में नकली दवाओं की आपूर्ति का मामला सामने आया था। इस पर आरोपियों पर प्रारंभिक कार्रवाई हुई है। सैंपलों की जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है। गली नवाबान स्थित लखनऊ ड्रग एजेंसी का लाइसेंस निलंबित किया जा चुका है। इसके विरोध में प्रोपराइटर मनोज कुमार खंडूजा ने कमिश्नर के यहां प्रार्थना पत्र दिया है।
सहायक आयुक्त औषधि संदीप कुमार ने बताया कि कमिश्नर के यहां मनोज कुमार खंडूजा का भांजा रजत कृपलानी और उसकी मां आई थीं। कमिश्नर ने प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लखनऊ ड्रग एजेंसी ने बहेड़ी स्थित जगदीश मेडिकल स्टोर को भी आगरा के बंसल मेडिकल एजेंसी के यहां से खरीदी गई नकली एलेग्रा-120 एमजी की सप्लाई दी है। शुरुआती जांच में लखनऊ ड्रग एजेंसी से एलेग्रा की 5,650 टेबलेट मिली थीं। इसमें से उसने 600 टेबलेट का बिल जगदीश मेडिकल स्टोर के नाम काट रखा है। इस मेडिकल स्टोर का लाइसेंस मनोज कुमार खंडूजा के सगे भांजे रजत के नाम है।
सहायक आयुक्त ने बताया कि जगदीश मेडिकल स्टोर पर जाकर औषधि निरीक्षक उर्मिला ने जांच की है। औषधि निरीक्षक ने उन्हें बताया है कि रजत ने अपने मामा के यहां से 600 टेबलेट एलेग्रा-120 एमजी खरीदने की बात स्वीकार की है, जबकि पहले इन्कार कर रहा था। सहायक आयुक्त ने बताया कि लखनऊ ड्रग एजेंसी और जगदीश मेडिकल स्टोर की जांच पूरी होने के बाद वह कमिश्नर को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। संवाद