मामूली कहासुनी...पुलिस ने गढ़ दी हमले की कहानी
जून 2020 में इटौआ खुशहाल तिराहे पर शीशगढ़ पुलिस वाहन चेकिंग कर रही थी। पुलिस के मुताबिक, बाइक सवार तीन मांस तस्करों की घेराबंदी की तो आरोपी फायरिंग कर भाग गए। पुलिस ने फर्जी नंबर प्लेट लगी तीन बाइकें मौके से बरामद कीं। पुलिस ने किच्छा दरऊ निवासी तीन सगे भाइयों के खिलाफ चार्जशीट लगाई। कोर्ट में पुलिस की कहानी झूठी साबित हुई। कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया। निर्णय में उल्लेख किया कि लगता है वाहन चेकिंग के दौरान आरोपियों से कहासुनी हुई और पुलिस ने यह कहानी गढ़ दी। कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश भी दिए थे।
दहेज हत्या में विवाहिता के पिता को सुनाई सजा
वर्ष 2023 में बिशारतगंज थाना क्षेत्र में एक महिला की ससुराल में मौत हो गई थी। पिता ने बेटी के ससुराल वालों के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजकर चार्जशीट लगाई थी। न्यायालय में वादी पिता ने बताया कि उसने पहले गलत बयान दिया था। उसकी बेटी ही ससुराल वालों से झगड़ा करती थी। न्यायालय ने कहा कि झूठे आरोपों की वजह से निर्दोष लोगों को मानसिक और आर्थिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। कोर्ट ने महिला के पिता को उतने ही दिन जेल में रहने की सजा सुनाई, जितने दिन (800 दिन) निर्दोष ससुराल वालों ने जेल में बिताए थे। इसमें भी पुलिस की विवेचना सवालों के घेरे में रही।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि पुलिस अपनी ओर से विवेचना में पूरी स्थिति स्पष्ट करती है। सही तथ्यों के आधार पर ही चार्जशीट या एफआर लगाई जाती है। अगर विवेचकों की ओर से कोई लापरवाही या मनमानी सामने आती है तो पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारी उनके विरुद्ध कार्रवाई करते हैं। किसी मामले में कोर्ट के निर्देश मिलते हैं तो उसका पूरा अनुपालन किया जाता है। तीन नए कानून लागू होने के बाद विवेचना पर निगरानी पहले के सापेक्ष और बढ़ाई गई है।