बरेली । जिले में 1141 बच्चे सैम (अति गंभीर तीव्र कुपोषण) श्रेणी में चिह्नित हैं। इन्हें न तो दवा मिल पा रही है, न ही इलाज पाने वाले बच्चों का डाटा ई-कवच एप्लीकेशन पर दर्ज हो पा रहा है। 28 अगस्त तक जो फीडिंग 29 फीसदी थी, 18 सितंबर तक बढ़कर सिर्फ 31.3 फीसदी हो पाई है। बच्चों के फॉलोअप की भी स्थिति काफी खराब है। शुक्रवार को बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की निदेशक सरनीत कौर ब्रोका ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान में जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) से नाराजगी जाहिर की है।
निदेशक ने डीपीओ को सीएमओ से समन्वय कर शत-प्रतिशत फीडिंग कराने के लिए कहा है। वैसे, इस मामले में 12 सितंबर को ही सीडीओ देवयानी ने सीएमओ को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि इसी लापरवाही की वजह से अगस्त में प्रदेश में जिले का 67वां स्थान रहा। बच्चों का ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस सत्र पर एएनएम व चिकित्सा अधीक्षक की तरफ से फॉलोअप की फीडिंग भी बहुत खराब है। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर 2,85,535 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें से अब तक 4,768 बच्चों का न तो वजन लिया गया है, न ही उनकी लंबाई नापी गई है। संवाद
स्वास्थ्य विभाग के पास कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए दवाएं हैं, लेकिन उनके वितरण की फीडिंग एएनएम नहीं कर रही हैं। इससे प्रगति कमजोर है। कितने बच्चों को दवाई दी जा चुकी है, यह जानकारी नहीं है। इसके लिए एएनएम और सीडीपीओ से रिपोर्ट लेंगे। - मनोज कुमार, डीपीओ