‘ए’ श्रेणी का दर्जा और करीब बीस हजार यात्रियों की आवाजाही वाले बरेली जंक्शन पर शौचालयों की व्यवस्था नाकाफी है। संख्या तो कम है ही, हाल भी बदहाल है। प्लेटफार्म पर इंतजार के दौरान अगर टॉयलेट केे इस्तेमाल की जरूरत महसूस हुई तो समस्या विकराल हो जाती है। महिला यात्रियों की परेशानी सबसे ज्यादा विकट होती हैै। दरअसल वे संकोच की वजह से न तो किसी से कह पाती हैं और न ही कोई विकल्प तलाश पाती हैं। कई बार प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेन के शौचालयों का ही इस्तेमाल करना पड़ जाता है। इस दौरान ट्रेन चल दे तो बस..।
हर रोज दोहराई जाती है टायलेट एक प्रेमकथा
कुछ दिन पहले एक फिल्म आई थी, टायलेट एक प्रेमकथा। अभिनेता के घर में शौचालय नहीं था और पत्नी ने खुले में शौच जाने से इंकार कर दिया। मजबूरन अभिनेता रोज सुबह पत्नी को शौच के लिए स्टेशन पर खड़ी ट्रेन के टायलेट तक ले जाते थे। बरेली जंक्शन पर इस फिल्म की कहानी हर रोज दोहराई जाती है, फर्क यह है कि यहां ट्रेन पकड़ने के लिए आने वाले दंपति शौचालय के अभाव में यह कहानी दोहराते हैं।
पे एंड यूज टायलेट पर अवैध वसूली
प्लेटफार्म नंबर एक पर आरक्षण काउंटर के पास पे एंड यूज टायलेट बना है, लेकिन यहां अवैध वसूली होती है। एक किनारे पर होने के चलते यह दूर से नजर भी नहीं आता। प्लेटफार्म एक पर स्थित प्रतीक्षालय में शौचालय है, लेकिन वहां सिर्फ आरक्षित श्रेणी का टिकट दिखाकर ही जाया जा सकता है।
नियम और हकीकत
रेलवे की नियमावली के मुताबिक हर प्लेटफार्म के अंत में सार्वजनिक शौचालय होना चाहिए, बेशक पे एंड यूज ही हो। मगर ऐसा सिर्फ प्लेटफार्म नंबर एक पर है। प्लेटफार्म नंबर दो के पूर्वी किनारे पर विकलांग शौचालय बना है। इसकी स्थिति बेहतर मिली लेकिन पश्चिमी किनारे पर बना शौचालय दुर्गंध और गंदगी के चलते यात्री इस्तेमाल नहीं करते। कई ट्रेनों से सामान अनलोड होने की वजह से शौचालय का रास्ता बंद हो जाता है या यहां ताला पड़ा रहता है। प्लेटफार्म नंबर चार, पांच और छह पर शौचालय नहीं है। यहां के यात्रियों को शंका समाधान के लिए दूसरे प्लेटफार्म पर जाना मजबूरी है।
फै क्ट फाइल--
- जंक्शन पर प्रतिदिन करीब बीस हजार यात्रियों की आवाजाही।
- अप और डाउन दिशा से करीब डेढ़ सौ ट्रेनों का आवागमन।
- पूर्वोत्तर रेलवे के प्लेटफार्म छह का निर्माण पूरा लेकिन शौचालय नहीं बने।
वर्जन
कुछ समय पूर्व ही प्लेटफार्म छह का निर्माण हुआ है, शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। जल्द ही अन्य सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी।
- राजेंद्र सिंह, पीआरओ इज्जतनगर मंडल
सभी प्लेटफार्म पर शौचालय हैं। सफाई का ठेका निजी ठेकेदार को दिया गया है। समय-समय पर अधिकारी भी निरीक्षण करते हैं।
- चेतन स्वरूप शर्मा, स्टेशन अधीक्षक
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ये है हमारे शहर में टॉयलेट की हालत...
अंतरराष्ट्रीय टॉयलेट दिवस पर शहर के कुछ अलग शौचालयों पर भी बात होना जरूरी है। चाहे नावल्टी का पैसे लेकर लघुशंका की सुविधा देने वाले शौचालय हों या फिर जिला अस्पताल का मोरचरी वाला शौचालय। कुतुबखाना जैसे बड़े बाजार में एक भी सार्वजनिक शौचालय ढंग का नहीं है, जिसे महिलाएं प्रयोग कर सकें। लल्ला मार्केट का तो एक शौचालय गायब ही हो गया है।
नावल्टी में पैसे देकर टॉयलेट जाएं
नावल्टी पर एक डीलक्स शौचालय जीआईसी की बगल में है जहां लघुशंका के दो रुपये और अन्य के लिए पांच रुपये वसूले जाते हैं। बाजार में आसपास के दुकानदार बताते हैं कि वे कभी लघुशंका के लिए टायलेट का प्रयोग नहीं करते, क्योंकि बार-बार दो रुपये का झंझट कौन पाले।
मोरचरी वाले शौचालय में कोई नहीं जाता
जिला अस्पताल में एक सार्वजनिक शौचालय ठीक मोरचरी के बगल में बना दिया गया है। इसका उपयोग केवल मोरचरी कर्मी करते हैं। अस्पताल आने वाली महिलाएं और पुरुष इसमें जाने से कतराते हैं।
कुतुबखाना के शौचालय महिलाओं के लिए नहीं!
वैसे तो कुुतुबखाना मार्केट, बड़ा बाजार और शास्त्री मार्केट में कई शौचालय बने हैं लेकिन इनमें महिलाएं नहीं जा सकतीं। कुतुबखाना घंटाघर के पास एक सार्वजनिक शौचालय है लेकिन इसका उपयोग भी सिर्फ पुरुष ही करते हैं।
गायब हो गया लल्ला मार्केट का टॉयलेट
लल्ला मार्केट का शौचालय आज तक नहीं मिल सका है। भूड़ वार्ड की निवर्तमान पार्षद शालिनी जौहरी बताती हैं कि पहले लल्ला मार्केट में एक शौचालय बनाया गया था लेकिन बाद में इसे नाले के चक्कर में तोड़ दिया गया। निगम के अभिलेखों में यह आज भी चल रहा है। यह मामला निगम बोर्ड में भी उठा था।
बाजारों में शौचालय के लिए पहले भी काफी विचार हुआ है। कई संस्था बनवाने के लिए आगे भी आई हैं। चुनाव बाद फिर से इस दिशा में काम होगा। लगातार संस्थाआें के संपर्क में बने हुए हैं।- आरके श्रीवास्तव, नगर आयुक्त