बरेली। साल 2037 तक बरेली शहर की आबादी 11.30 लाख से बढ़कर 14 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए सफाई और कूड़ा प्रबंधन को बेहतर और टिकाऊ बनाने के लिए सिटीज 2.0 के तहत नई कूड़ा निस्तारण कार्ययोजना तैयार की जा रही है। नगर निगम और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड की टीम इस पर काम कर रही है। विशेषज्ञ समिति दो महीनों में अपनी रिपोर्ट देगी।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कूड़ा निस्तारण के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसी के चलते हाल ही में टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड की टीम ने चार दिन तक शहर के अलग-अलग स्थलों का निरीक्षण किया। अब टीम लौट चुकी है और वह शहर की बुनियादी जानकारी, मौजूदा संसाधनों और भविष्य की आवश्यकताओं के आधार पर कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में मंथन कर रही है। भविष्य की चुनौतियों की पहचान करते हुए रूपरेखा बनाई जा रही है। विशेष तौर पर कूड़े को अलग-अलग करने, फिर उसके वैज्ञानिक निस्तारण और डलावघरों को समाप्त करने पर जोर दिया जा रहा है।
कूड़ा निस्तारण की इश योजना पर 87 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें सिटीज 2.0 के तहत 75 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से प्राप्त होने हैं, जबकि शेष राशि नगर निगम वहन करेगा। इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रावधान है। आवश्यकता अनुसार बजट में बदलाव भी संभव है। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि नई कार्ययोजना के धरातल पर उतरने से शहर को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाए रखने में मदद मिलेगी। यह कार्ययोजना शहर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। टीम ने स्थलीय सर्वेक्षण कर लिया है। अब रिपोर्ट तैयार होनी है। ब्यूरो