बरेली। आईडी की हेरफेर कर 13.41 लाख के गृहकर बिल काे 30 हजार का बना दिया गया। पुरानी आईडी को दूसरे जोन के ग्रामीण क्षेत्र में शिफ्ट कर उस बिल में दुकानें आदि दिखा दीं। यह मामला महज बानगी है, ऐसा खेल कई अन्य मामलों में भी हुआ होगा। नगर आयुक्त ने करोड़ों रुपये गबन की आशंका जताते हुए मामले की जांच का निर्देश दिया है। हालांकि, अभी जांच अधिकारी नामित नहीं किया गया है।
नगर निगम की ओर से शहर के पाॅश इलाके डीडीपुरम में व्यावसायिक भवन का 13.41 लाख का बिल जारी किया गया था। इसके बाद बकायेदार को नोटिस भेजा गया, जिसमें 30,697 रुपये ही दिखाए गए। गोपनीय शिकायत के बाद हुई प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है। इसमें कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर संबंधित अधिकारी की मिलीभगत सामने आ रही है। बिल को कम करने के लिए पुरानी आईडी को जोन चार से हटाकर जोन एक में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद पॉश इलाके की पुरानी आईडी को ग्रामीण क्षेत्र में दिखाकर बिल से उसे हटा दिया गया।
पकड़ में न आए मामला, इसलिए नोटिस पर लिख दिया अध्यासी
जिस आईडी पर 13.41 लाख बकाया है, उसका बिल उपभोक्ता के नाम से है। वहीं, सांठगांठ कर 30 हजार का जो नोटिस भेजा गया है, उसपर नाम हटाकर अध्यासी कर दिया है। इससे यह लोगों की नजर में आने से बच सकता था। हालांकि प्राॅपर्टी आईडी वही है, जिसमें 13.41 लाख का बिल बकाया था। भेजे गए नोटिस में गृहकर 13,953, जलकर 13,255 और सीवर कर 3,488 रुपये दिखाया गया है।
फोटो से पकड़ में आया घपला
कर विभाग के जिम्मेदारों ने बिल को कम तो कर दिया, लेकिन आईडी में भवन का फोटो नहीं बदला। नोटिस की आईडी के हिसाब से अधिकारियोें ने जांच की तो उसमें भूखंड का फोटो लगा है, जबकि बिल कॉमर्शियल प्रॉपर्टी का दिखाया है। संवाद
पुरानी आईडी को दूसरी जगह शिफ्ट करने व बिल घटाने की बात सामने आई है। सांठगांठ के बिना ऐसा नहीं हो सकता। इसकी जांच करवा रहे हैं। अन्य बिलों में भी अगर ऐसी गड़बड़ियां सामने आईं तो संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब कर कार्रवाई की जाएगी। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त