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बकैनिया वीरपुर में चंद शौचालय, उन पर भी छप्पर

Thu, 10 Jul 2014 05:33 AM IST
Bareilly
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मीरगंज/दुनका। बेपरवाह सरकारी अमले ने मीरगंज के कई गांवों में प्रशासन की सख्ती को ठेंगा दिखा दिया है। सिर पर मैला ढोने और ढुलाने वालों के खिलाफ एफआईआर कराना तो दूर, गांवों में कमाऊ शौचालय बंद तक नहीं कराए गए हैं।
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दुनका, बसई, सहोड़ा समेत तमाम गांवों में अभी भी कमाऊ शौचालयों की हर सुबह सफाई कर वाल्मीकि बिरादरी की महिलाएं सिर पर मैला ढोने का काम कर रही हैं। बकैनिया वीरपुर में अमर उजाला की टीम पहुंची तो गंदा सच बेनकाब हो गया। गांव के 90 फीसदी लोग शौच के लिए जंगल में जाते हैं। जवान लड़कियां और नवविवाहित बहुएं तक शौच का नित्यकर्म हर रोज गांव के पास तालाब किनारे ही निपटाती हैं। अक्सर शोहदे इनसे छेड़छाड़ कर बैठते हैं, लेकिन शौचालय नहीं बनवाए गए हैं। कुछ घरों में सरकारी शौचालय बने भी हैं तो उनकी छत पर लिंटर तक नहीं पड़े हैं। कुछ में कंडे़ भर दिए गए हैं तो कुछ को औरतें नहाने के काम में ला रही हैं।
नेमचंद के घर में सरकारी शौचालय तो बना है लेकिन उस पर न तो लिंटर है और न ही दरवाजा। आड़ के लिए फट्टा टांग दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में बना शांति के इंदिरा आवास पर आज तक लिंटर नहीं पड़ सका है। छप्पर डालकर काम चलाया जा रहा है। बुद्धसेन बीपीएल राशनकार्ड धारक है लेकिन उनका इंदिरा आवास मंजूर नहीं हुआ है। पुराने गिरताऊ मकान पर छप्पर पड़ा है। शौचालय पर भी लिंटर के बजाय छप्पर है। मनीराम के घर में बना शौचालय भी एक अदद पक्की छत को तरस रहा है। बकैनिया वीरपुर में दो दर्जन से ज्यादा शौचालय अधबने हैं। इसकेे बावजूद ग्राम पंचायत अधिकारी रामसुरेश गुप्ता गांव में अधूरे शौचालय होने से इनकार करते हैं।
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फोटो-
-08एमआरजेडपी- बकैनिया वीरपुर में नेमचंद के छप्परदार इंदिरा आवास के शौचालय पर पड़ा छप्पर, दरवाजे पर टंगा टाट।
-पी1-अपने छप्परदार इंदिरा आवास के बाहर बच्चों संग खड़ी बुद्धसेन की पत्नी।
-पी2-मनीराम के शौचालय की लिंटर विहीन छत पर रखा लकड़ियों का ढेर।
-पी3-शांति का इंदिरा आवास, सरकार ने लिंटर नहीं डाला तो पन्नी, छप्पर तानकर चला रही है काम।
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