बरेली। राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेश चंद्र ने कॉलेज के चपरासी भजन लाले के खिलाफ फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। डीएम के आदेश पर बीएसए ने इस मामले की जांच की थी।
अलीगंज के खैलम देहा जागीर गांव का रहने वाले भजनलाल पुत्र रूद्र प्रसाद की राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में चपरासी पद पर 10 जून 2009 को नियुक्ति हुई थी। 17 जून को भजन लाल ने स्वामी जूनियर हाई स्कूल सोरहा की आठवीं कक्षा की टीसी और अंक तालिका जमा की थी। प्रमाण पत्रों पर उसका अनुक्रमांक 176 था। तीन सितंबर 2012 को भजनलाल के गांव के ही साबिर ने डीएम से शिकायत की कि वह फर्जी प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रहा है। डीएम के आदेश पर बीएसए ने जांच की तो आरोप सही पाया गया। मंगलवार को प्राचार्य डॉ. सुरेश चंद्र ने भजनलाल के खिलाफ धोखाधड़ी से सरकारी नौकरी करने के आरोप में मुकदमा लिखा दिया।
वेतन की हो सकती है रिकवरी
फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे भजनलाल को अब तक वेतन के रूप में सात लाख 85 हजार 990 रुपये दिए गए। इस रकम की उससे वसूली की जा सकती है। प्राचार्य डॉ. सुरेश चंद्र ने बताया कि पांच जुलाई को भजनलाल को बर्खास्त कर दिया गया है। वेतन की रकम की वसूली का फैसला कोर्ट करेगा।