बरेली। बहेड़ी के गांव सावंत शमाली में निजी जमीन पर जबरन सरकारी इंटर कॉलेज बनाने के मामले में स्थगनादेश देने पर सिविल जज (जूयिर डिविजन) अंकित गोयल को सीधे-सीधे निशाना बनाने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। इस मामले में बरेली के डीएम-एसएसपी और इंस्पेक्टर बहेड़ी के साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी 25 जून को तलब किया है। सिविल जज अंकित गोयल की शिकायत है कि पहले तो एक नगर पालिका कर्मचारी समेत पांच लोगों ने उनके सरकारी आवास में घुसकर हमला किया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद एक दरोगा ने उनके आवास में घुसकर उन्हें धमकियां दीं। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को शिकायत भेजी गई मगर वहां भी उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट ने इसे न्याय पालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है। अदालत के आदेश के अनुपालन के लिए डीएम एसएसपी इलाहाबाद पहुंच गए हैं।
गांव सावंत शमाली में रहने वाले एजाजुल हक ने सिविल जज (जूनियर डिविजन) बहेड़ी की अदालत में एक अर्जी दाखिल की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार की ओर से उनकी निजी जमीन पर जबरन इंटर कॉलेज का निर्माण कराया जा रहा है। अदालत ने इस अर्जी पर 24 फरवरी 2014 को स्थगनादेश जारी कर दिया, इसके बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका। एजाजुल हक ने दोबारा कोर्ट में अर्जी दाखिल की तो सिविल जज अंकित गोयल ने वादी के खर्च पर पुलिस भेजकर निर्माण कार्य रोकने का आदेश जारी किया, लेकिन कोर्ट के इस आदेश पर भी काम नहीं रुका।
सिविल जज अंकित गोयल की ओर से हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी गई शिकायत के अनुसार 31 मई की रात को आठ और नौ बजे के बीच पांच अज्ञात लोग उनके सरकारी निवास में घुस आए। जान के अंदेशे से वह अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर घर के भीतर कमरे में बंद हो गए। हमलावरों ने चीख-चीखकर कहा, ‘तू डीएम के खिलाफ बहुत आदेश करता है, तुझे और तेरे परिवार को मौत की नींद सुला देेंगे’। आरोप है कि सिविल जज ने फोन पर थाना बहेड़ी पुलिस को सूचना दी, जिसके काफी देर बाद एसएसआई अमित सिंह राठी दूसरे पुलिस वालों के साथ पहुंचे। पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया जबकि बाकी लोग भाग गए। एक व्यक्ति को लोगों ने नगर पालिका बहेड़ी का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राममोहन वाल्मीकि बताया।
शिकायत में कहा गया है कि इसके बाद एक जून 2014 को एसएसआई अमित सिंह राठी करीब एक बजे उनके सरकारी आवास में बगैर अनुमति लिए घुस आए और उन्हें धमकी देते हुए कहा कि आराम से नौकरी करो। कलेक्टर या शासन के खिलाफ कोई आदेश मत दो वर्ना जान और अपनी नौकरी दोनों से हाथ धो बैठोगे। सिविल जज (जूनियर डिविजन) अंकित गोयल ने इसकी शिकायत हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी। साथ ही डीएम बरेली को न्यायालय की अवमानना को नोटिस देते हुए छह जून को पेश होने का आदेश दिया।
एजाजुल हक समेत 12 अन्य लोगों ने भी एक याचिका अधिवक्ता वेद मणि शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में दाखिल की और हाईकोर्ट को सभी तत्वों से अवगत कराया। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और सुनीत कुमार ने इसे काफी गंभीरता से लेते हुए उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, बरेली के डीएम व एससपी बरेली और इंस्पेक्टर बहेड़ी को 25 जून को अदालत में तलब किया है।
यदि यह आरोप सही है तो यह न्याय पालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है और इस स्थिति को गंभीरता और सख्त हाथों से नियंत्रित किया और रोका जाना चाहिए। - सुधीर अग्रवाल व सुनीत कुमार, न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय इलाहाबाद