बरेली। फतेहगंज पूर्वी में हाईवे पर बुधवार तड़के हादसे का शिकार हुई डग्गामार बस में सवार 12 लोगों की मौत के बाद जब जिला प्रशासन से लेकर शासन तक हिला हुआ था, उस वक्त भी जिले का सड़क परिवहन महकमा आराम की नींद सोता रहा। बरेली के अफसरों की इस बेअंदाजी ने लखनऊ में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की भी जमकर किरकिरी कराई। मुख्यमंत्री हादसे में मारे गए लोगों के लिए मुआवजे की घोषणा कर चुके थे, फिर भी उन्हें इस हादसे की जानकारी नहीं थी। बृहस्पतिवार को परिवहन आयुक्त ने जब इस मामले में आरटीओ का जवाब-तलब किया तब कहीं हादसे की रिपोर्ट ऊपर भेजी गई, लेकिन फिर भी पूरे 40 घंटे बाद।
बहराइच से 110 सवारियों को लेकर दिल्ली जा रही डग्गामार बस बुधवार तड़के करीब तीन बजे फतेहगंज पूर्वी में दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। सुबह छह बजे तक डीएम-एसएसपी समेत जिले के तमाम अफसरान घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य में जुट गए थे लेकिन डग्गामार गाड़ियों से दिन-रात वसूली करने वाला सड़क परिवहन महकमा इस भीषण दुर्घटना से बेखबर बना रहा। इस हादसे के बाद कोई कार्रवाई करना तो दूर महकमे का कोई अफसर घटनास्थल तक भी नहीं पहुंचा। नतीजा यह हुआ कि जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने दोपहर के वक्त जब मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा की तब भी प्रदेश के परिवहन आयुक्त रजनीश गुप्ता इस दुर्घटना के ब्योरे से बेखबर थे।
अपने महकमे के अफसरों की इस लापरवाही से लखनऊ में काफी किरकिरी होने के बाद ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने बरेली की आरटीओ ममता शर्मा का जवाब-तलब किया। तब जाकर कहीं महकमा होश में आया लेकिन इसके बाद भी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को दुर्घटना की रिपोर्ट भेजने में पूरा दिन लगा दिया गया। दुर्घटना के पूरे 40 घंटे बाद बृहस्पतिवार को शाम करीब साढ़े सात बजे यह रिपोर्ट उप परिवहन आयुक्त को भेजी गई।
एआरटीओ ने कहा- मैं तो दौड़भाग करता रहा
आरटीओ ममता शर्मा ने बताया कि दुर्घटना के बारे में जानकारी एआरटीओ प्रवर्तन परेश यादव को देनी थी। उन्हें इसके लिए निर्देश भी दे दिया गया था। जब ट्रांसपोर्ट कमिश्नर दफ्तर से जवाब-तलब हुआ तो रिपोर्ट बनाकर भेजी गई। एआरटीओ प्रवर्तन परेश यादव ने दो पृष्ठों का उत्तर आनन-फानन में तैयार किया। इसमें कहा गया है कि वह रात भर चेकिंग कर रहे थे इसलिए इस दुर्घटना की जानकारी उन्हें नहीं मिली। सुबह पता लगा कि सुभाषनगर इलाके में एक्सीडेंट हो गया है। वह दौड़कर वहां पहुंचे तो पता पता चला कि दुर्घटना फतेहगंज पश्चिमी में हुई है। इस पर वह मीरगंज की ओर भागे लेकिन वहां जाकर पता चला कि दुर्घटना फतेहगंज पूर्वी में हुई। इसके बाद वह दोपहर 12.30 बजे मौके पर पहुंचे और दुर्घटना के बारे में जानकारी ली। वहां से शाम 4.24 बजे वापस आकर 7.32 बजे उप परिहवन आयुक्त जेपी सिंह को घटना की रिपोर्ट भेजी और फिर रात नौ बजे मुख्यालय को ईमेल किया।
डग्गामार बस का पंजीकरण रद्द होगा
आरटीओ प्रवर्तन संजय सिंह ने दुर्घटनाग्रस्त डग्गामार बस का पंजीकरण रद्द करने के लिए सीतापुर आरटीओ कार्यालय को लिखा है। संजय सिंह ने बताया कि वाहन पंजीकरण, परमिट आदि रद्द करने के लिए जिला कार्यालय ही अधिकृत होता है। इसलिए इस मामले में सीतापुर आरटीओ को लिखा गया है। उन्होंने बताया कि बस लखनऊ कार्यालय में पंजीकृत थी लेकिन बाद में सीतापुर ट्रांसफर हो गई थी।
दस अवैध बसें पकड़ी गईं
जयपुर और दिल्ली मार्ग पर संचालित डग्गामार बसों के खिलाफ आरटीओ ने अचानक अभियान शुरू किया जिसके पहले दिन दस बसें पकड़ी गई। हालांकि विभागीय अफसरों ने मिलीभगत के चलते इन बसों का चालान भर किया है। एक भी बस सीज नहीं की गई। बताया जाता है कि हादसे के बाद हुई फजीहत से बचने के लिए तीनों एआरटीओ प्रवर्तन ने बृहस्पतिवार को कागजी खानापूरी कर दी। एक आपरेटर ने बताया कि रिंकू ट्रैवल्स की डग्गामार बसों से विभाग की साठगांठ है इसलिए उसकी बसों पर अफसरों की खास कृपा बनी रहती है।