बरेली। शहामतगंज से सेटेलाइट बस स्टैंड के बीच एक बार जाम में फंसे तो निकलना मुश्किल है। यह सड़क ट्रकों और बसों का अवैध अड्डा है। बीच-बीच में टेंपो, ऑटो और टैक्सी स्टैंड बन गए हैं। रही कसर कदम-कदम पर बैठे मैकेनिकों ने पूरी कर दी है।
दोपहर एक बजे आजाद इंटर कॉलेज के सामने से लेकर सेटेलाइट तक 115 ट्रक , डेढ़ दर्जन डीसीएम और 25 प्राइवेट बसें सड़क किनारे खड़ी थीं। इनमें कई स्कूल बसें थीं। गाड़ियां बेतरतीब खड़ी होने से डिवाइडर के दोनों तरफ एक चौथाई सड़क घिरी थी। शहामतगंज पेट्रोल पंप से सेटेलाइट के बीच छोटी-बड़ी 65 दुकानें हवा, पंचर और मोटर मैकेनिक वालों की हैं। इनमें ज्यादातर लकड़ी के खोखे में चल रही हैं। मालियों की पुलिया से मानसिक अस्पताल रोड पर पंद्रह मैकेनिक बैठते हैं। सभी दुकानों के आगे ट्रक और बस बेतरतीब खड़े हैं। फरीदपुर की ओर जाने वाली मैक्स जीप और मैजिक का अड्डा मालियों की पुलिया चौराहे पर हैं। अमर उजाला गेट के पास अवैध ऑटो स्टैंड और उसके सामने डिवाइडर के दूसरी ओर जहानाबाद (पीलीभीत) जाने वाली मैक्स जीपों का अवैध अड्डा है। आजाद इंटर कॉलेज के सामने फरीदपुर जाने वाली मिनी बसों और टेंपो (विक्रम) स्टैंड है। यानी शाहजहांपुर रोड पर व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है।
ट्रांसपोर्ट नगर बसे तो ट्रक खुद हट जाएंगे
ट्रक ऑनर्स ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय अग्रवाल कहते हैं कि केवल गाड़ी वालों पर शिकंजा कसने से कुछ नहीं होगा। ट्रांसपोर्ट नगर बस जाए तो ट्रक वाले खुद शाहजहांपुर रोड से हट जाएंगे। दूसरा ट्रांसपोर्ट नगर ट्यूलिया गांव में बनाया जाए। ट्रक मालिक नीरज शर्मा के मुताबिक ट्रांसपोर्ट नगर बस नहीं पाया। ट्रांसपोर्ट सारे शहर में हैं। रेलवे ट्रैक चनेहटी और सुभाषनगर में है। शहर और ट्रांसपोर्ट नगर के बीच आने-जाने में तीन सौ रुपये का डीजल लगता है इसीलिए कोई जाना नहीं चाहता। ट्रांसपोर्ट नगर बसने तक विकल्प के तौर पर ट्रक पीलीभीत बाईपास रोड पर खड़े किए जा सकते हैं। ट्रक मालिक कल्लू भाटिया कहते हैं कि ट्रांसपोर्ट नगर में न ट्रांसपोर्ट हैं और न मैकेनिक। प्रशासन कई बार डंडा चला चुका है लेकिन ट्रक नहीं हटे। 90 प्रतिशत ट्रक शहर के हैं। संख्या कम करने के लिए कुछ गाड़ियां पीलीभीत बाईपास रोड पर खड़ी हो सकती हैं लेकिन बगैर ट्रांसपोर्ट नगर बसे 12-13 किलोमीटर दूर कोई नहीं जाएगा। ट्रक मालिक हजारी लाल जाम का कारण मैकेनिक और रोडवेज बसों को मानते हैं। मैकेनिक लालच में एक के बाद एक गाड़ी खड़ी करा लेते हैं। रोडवेज वालों ने डिवाइडर तोड़कर पेट्रोल पंप जाने का सीधा रास्ता बना लिया है। ईसाईयों की पुलिया पर पुलिस न होने से वाहन डिवाइडर के दूसरी तरफ से होकर आते हैं। मालियों की पुलिया चौराहे पर टैक्सी स्टैंड होेने से बड़ी गाड़ियों के मुड़ने को भरपूर जगह नहीं रहती।
ज्यादातर दुकानें बेचने वालों के पास
ट्रांसपोर्टर आशु अग्रवाल ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर में 20 प्रतिशत दुकानें ट्रांसपोर्ट और मैकेनिकों की हैं। बाकी 80 प्रतिशत दुकानें उन लोगों के पास हैं जो खुद कारोबार न करके दुकान का रेट बढ़ने के इंतजार में है। प्रशासन समय सीमा तय करके ऐसे लोगों को नोटिस जारी करे। तय समय के बाद जमा की रकम लौटाकर दुकानें अपने कब्जे में लेकर जरूरतमंद को दे।
सेटेलाइट के सामने बन सकता है अड्डा
बरेली-बीसलपुर बस यूनियन सचिव अशोक कुमार गुप्ता के मुताबिक यह बस अड्डा कई दशक पुराना है। यहां दिक्कत बसों से नहीं, ट्रकों के जमघट से है। विकल्प के तौर पर सेटेलाइट बस स्टैंड के सामने अड्डा बन सकता है। वहां रोड किनारे जमीन खाली पड़ी है। इसके लिए आरटीओ से कहा भी था।निजी बस मालिक विशंभर सिंह कहते हैं कि बसों का परमिट बीसलपुर से शहर तक है। शुरू में यह अड्डा अयूब खां चौराहे पर था। फिर शहामतगंज में बना और अब यहां है। इसमें प्रशासन कुछ कर सकता है। नगर निगम से जमीन मिल जाए तो वहां बसें खड़ी होने लगेंगी। हर जगह बस अड्डे रोड पर ही होते हैं। निजी बस मालिक अनिल गुप्ता कहते हैं कि बसें तो कहीं खड़ी की जा सकती हैं। किराया बीसलपुर का उतना ही रहेगा। मगर शहर से बाहर जाने पर सवारियों को ज्यादा दिक्कत होगी।
कोट
उस इलाके में बस अड्डे के लिए कहीं जगह ही नहीं है। फिर भी इस संबंध में एसपी ट्रैफिक से बातचीत कर कुछ हल निकाला जाएगा।
- उमेश प्रताप सिंह, नगर आयुक्त
वाहनों को नियंत्रित करना ट्रैफिक पुलिस का काम है। बस अड्डे की जमीन डीएम और एसपी ट्रैफिक तय करेंगे। यह हमारा काम नहीं है।
- आरके वर्मा, एआरटीओ प्रशासन