बरेली। दोनों लोकसभा सीटों पर करारी हार के बाद सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में अंदरूनी घमासान बढ़ता जा रहा है। चुनाव से पहले हाईकमान को जनता के बीच पार्टी के जनाधार का गलत फीड बैक देने वाले पदाधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर सुर तेज होने लगे हैं। लोकसभा चुनाव में हार से पार्टी में बढ़ते असंतोष को देखते हुए जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव ने दोनों सीटों पर हार की जिम्मेदारी नैतिक रूप से अपने ऊपर लेकर पद से इस्तीफे का निर्णय हाईकमान पर छोड़ दिया है।
जिला मुख्यालय में बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में वीरपाल ने कहा कि जिलाध्यक्ष होने के नाते लोकसभा चुनाव में बरेली और आंवला में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी वह अपने ऊपर लेते हैं। दोनों सीटों पर मिलने वाले वोटों की बूथवार रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को भेजी गई है। जहां तक जिलाध्यक्ष पद से उनके इस्तीफा देने का सवाल है तो इस पर निर्णय हाईकमान करेगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में जनता ने जो निर्णय दिया है, वह उसका सम्मान करते हैं लेकिन जिन परिस्थितियों में यह फैसला करने के लिए मजबूर होना पड़ा, इसकी समीक्षा करने की जरूरत है। सपा जिलाध्यक्ष ने चुनाव में भाजपा और आएसएस पर वोटरों को धर्म के नाम पर गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव में मिले वोटों से साबित होता है कि समाजवादी पार्टी की लोकप्रियता कम नहीं हुई। बसपा और कांग्रेस के वोट भाजपा में चले जाने से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। प्रेसवार्ता में जिला प्रवक्ता संजीव यादव, ब्लाक प्रमुख गुड्डू यादव भी मौजूद रहे।