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नगर निगम में रुकता नहीं तेल का खेल

Fri, 25 Apr 2014 05:30 AM IST
Bareilly
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बरेली। नगर निगम में जारी तेल के खेल की जांच रिपोर्ट में कर्मचारियों का कारनामा सामने आया है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी की जांच रिपोर्ट में एक महीने में 6869 लीटर डीजल का अंतर पाया गया। नगर निगम के चारों गैराजों से डीजल वितरण की पुरानी व्यवस्था में इतना डीजल ज्यादा खर्च हो रहा था। नई व्यवस्था में एक महीने के अंदर इतने ही डीजल की बचत दिखाई गई है। जांच रिपोर्ट की मानें तो पिछले दो साल में हर महीने इतना डीजल ज्यादा खर्च हुआ। नगर निगम कर्मचारियों ने अपने विभाग को दो साल में करीब 1.65 लाख लीटर डीजल का चूना लगाया।
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नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसपीएस सिंधू ने 21 जनवरी से 21 फरवरी 2014 तक नगर निगम के वाहनों में खर्च होने वाले डीजल की जांच की। इसमें स्टोर गैराज, सीआई पार्क गैराज, किला गैराज और सिविल लाइन गैराज में 44751 लीटर डीजल का खर्च पाया गया। इस दौरान डीजल वितरण की व्यवस्था ट्रांसपोर्ट लिपिक हरिओम के पास थी। 19 फरवरी को डीजल वितरण की व्यवस्था ट्रांसपोर्ट लिपिक से हटा दी गई। तब इतने ही वाहन चलने पर 21 फरवरी से 20 मार्च 2014 तक डीजल का खर्च 37882 लीटर पाया गया। जांच में दोनों महीनों के डीजल खर्च का अंतर 6869 लीटर मिला। इस हिसाब से देखा जाए तो ट्रांसपोर्ट लिपिक के दो साल के कार्यकाल में लगभग 1.65 लाख लीटर डीजल ज्यादा खर्च हुआ और नगर निगम को लगभग 10 लाख रुपये की चपत लगी। यहां गौर करने वाली बात यह है कि तीन महीने पहले ट्रांसपोर्ट लिपिक हरिओम ने भी अपने कार्यकाल में हर साल 57238 लीटर डीजल की बचत करने का दावा किया था। घपले की जांच का नतीजा चाहे जो निकले लेकिन नगर निगम में तेल का खेल जारी है।

कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार
नगर निगम के डीजल घपले की जांच को तीन सदस्यीय कमेटी बनी थी। कमेटी ने अब तक डीजल घपले की जांच कहां तक की उस रिपोर्ट के आने का इंतजार है।

कोट
नगर निगम के डीजल घपले की जांच को तीन सदस्यीय कमेटी बनी थी। फिर नगर स्वास्थ्य अधिकारी अकेले कैसे जांच कर सकते हैं। कमेटी की रिपोर्ट मिलने पर ही डीजल घपले की असली बात पता चलेगी। तभी घपले के आरोपियों पर कार्रवाई होगी।
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- उमेश प्रताप सिंह, नगर आयुक्त
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फोटो-

ऑडिट मामले में दो अफसरों में ठनी

- मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने कार्यकारिणी को फिर लिखा पत्र, वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका

अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। नगर निगम के दो अफसरों में अभिलेखों का लेखा परीक्षण न कराने को लेकर ठन गई है। मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने नगर निगम अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए ज्यादातर अभिलेखों का लेखा परीक्षण न कराने पर आपत्ति जताते हुए शासन और मेयर को पत्र लिखा है। लेखा परीक्षण के लिए अभिलेख न भेजने के पीछे गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका भी जाहिर की गई है।
एमएनएलपी अशोक यादव की ओर से शासन को लिखे पत्र में बताया गया कि नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 142, 143 और 144 के अंतर्गत नगर आयुक्त के माध्यम से समस्त अभिलेखों को आय-व्यय के लेखा परीक्षण के लिए मुख्य नगर लेखा परीक्षक के समक्ष प्रस्तुत करना जरूरी है। ऐसा न करना नगर निगम अधिनियम 1959 और लेखा नियमावली 1960 का उल्लंघन है। मुख्य नगर लेखा परीक्षक के मुताबिक पिछले 10 महीने के कार्यकाल में केवल 77 अभिलेख प्राप्त हुए। इनमें प्रकाश विभाग के सात, निर्माण व कीपर के 10-10, नजारत के 11 और जलकल के 39 अभिलेख शामिल हैं। मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने अभिलेखों को परीक्षण के लिए प्रस्तुत न करने को सरकारी काम में जानबूझकर बाधा डालने का आरोप भी लगाया है। मुख्य नगर लेखा परीक्षक के पत्र से स्वास्थ्य, निर्माण, जलकल, टैक्स और राजस्व आदि विभागों में हड़कंप मच गया है।

कोट
मेरे पास किसी भी विभाग के अभिलेख लेखा परीक्षण के लिए नहीं आ रहे हैं। यह नगर निगम अधिनियम प्राविधानों का स्पष्ट उल्लंघन हैं। संबंधित विभाग के शायद गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की वजह से अभिलेखों का लेखा परीक्षण कराने से बच रहे हैं। इस बारे में हमने शासन, और मेयर को पहले भी पत्र लिखे थे। अब भी पत्र लिखा गया है।
- अशोक यादव, मुख्य नगर लेखा परीक्षक

मुख्य नगर लेखा परीक्षक के पास अभिलेख बराबर परीक्षण के लिए जा रहे हैं। अगर वह ऐसा कह रहे हैं तो उनके बारे में अब मैं क्या टिप्पणी करूं।
- उमेश प्रताप सिंह, नगर आयुक्त

नगर निगम के समस्त विभागों को अपनी पत्रावलियों का नियमित लेखा परीक्षण कराना चाहिए। नगर आयुक्त ने खुद भी विभागों को लेखा परीक्षण के लिए लिखा था। फिर भी अफसर उस पर अमल नहीं कर रहे तो यह गंभीर विषय है।
- डॉ. आईएस तोमर, मेयर
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फ्लैग- नगर निगम का हाल

अधूरी सड़क पर भी ठेकेदार को मिल गए दो लाख
मानक की अनदेखी पर क्षेत्र के लोगों के विरोध के बाद बंद हो गया था काम
बरेली। नगर निगम बोर्ड से छह महीने पहले वार्ड 61 में साढ़े तीन लाख रुपये से टाइल्स की सड़क स्वीकृत की गई। ठेकेदार ने निर्धारित मानक से कम गुणवत्ता के टाइल्स लगवाकर निर्माण शुरू करा दिया। इलाके के जागरूक लोगों ने गुणवत्तायुक्त टाइल्स लगाने की मांग की तो ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर चला गया। इतना ही नहीं, अधूरे काम के लिए ठेकेदार को दो लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। अब इस अधूरी सड़क पर तीन महीने के भीतर ही बड़े बड़े गड्ढे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव से पहले क्षेत्र के लोगों ने सड़क की मरम्मत न होने पर मतदान बहिष्कार की धमकी भी दी लेकिन लोगों के समझाने पर स्थानीय लोगों ने मतदान किया। फिलहाल अब मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
वार्ड 61 जगतपुर मोहन तालाब में सैयद के मकान से शाकिर के मकान तक इंटरलाकिंग टाइल्स से सड़क बननी थी। ठेकेदार ने करीब तीन माह पूर्व काम शुरू कर दिया। मगर, घटिया टाइल्स लगाने का विरोध करने पर ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ दिया। पार्षद जहीरुद्दीन का आरोप है कि सड़क निर्माण पूरा न होने के बावजूद ठेकेदार को दो लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। जितनी सड़क ठेकेदार ने बनवाई उसमें भी मानक के अनुसार काम नहीं हुआ।
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सड़क अधूरी छोड़ने के मामले की जांच करा रहा हूं। दो या तीन दिन में जांच पूरी होगी। इसके बाद ही पूरी बात साफ होगी।
-सतीश कुमार, अधिशासी अभियंता नगर निगम
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