बरेली। मतदान में अब बहुत कम वक्त बचा है। मतदाता अपना रुख तेजी से बदल रहे हैं। जाति या धर्म के नाम पर बंटने वाला वोटर भी विकास और रोजगार को ही प्राथमिकता दे रहा है। एक दशक पूर्व दर्जनों उद्योग-फैक्ट्रियां बंद होने से आहत युवा मतदाता रोजगार के मुद्दे पर ही वोट डालने का मन बना चुके हैं। खस्ताहाल सड़कें और हर बरसात में जलभराव का सामना करने वाले सुभाषनगर की वीर भट्टी, विश्वनाथपुरम, जागृति विहार, गंगानगर, शांति विहार आदि कालोनियों में स्नातक और परास्नातक करने के बाद सैकड़ों की संख्या में युवक बेरोजगार घूम रहे हैं। उनका मानना है कि बरेली में कई बड़े काम हुए हैं लेकिन अभी बहुत कुछ होना बाकी है। बिजली, पानी, सड़क और यातायात की सुविधा अब थोड़ा-थोड़ा सुधरने लगी है। हालांकि अभी नए उद्योगों को लाया जाना जरूरी है, तभी उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सेना से रिटायर हो चुके कर्मचारी हों या व्यापारी, सबका मानना है कि सद्भाव के आइने में विकास हो ताकि उसका फायदा समाज के हर वर्ग को समान रूप से मिले।
खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत का इंतजार
पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन के कार्यकाल में सुभाषनगर, ग्वाल गली, अवधपुरी, कालीचरन मार्ग आदि इलाकों में नाली, सड़क, पुलिया, हॉटमिक्स, सड़क सुधार के 33 काम कराए। इन कार्यों पर 91.73 लाख रुपये खर्च हुए। पिछले दो साल से मरम्मत न होने से यह सड़कें फिर खस्ताहाल होने लगी हैं। यहां के बाशिंदों को इनकी मरम्मत का इंतजार है।
क्या कहते हैं लोग
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छह बार के सांसद के कार्यकाल में नए उद्योग लगने के बजाय पुरानी फैक्ट्रियां बंद हो गईं। अब जाति या धर्म के फेर में लोग नहीं पड़ेंगे। बरेली को हर क्षेत्र में विकास की जरूरत है।
- मुकेश बाल्मीकि
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जनता को बिजली, पानी सड़क चाहिए और पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार। नए उद्योग को कच्चा माल उपलब्ध कराने का वातावरण मिलेगा तो रोजगार के अवसर स्वयं बढ़ेंगे।
-नत्थूलाल, रिटायर्ड दूरसंचार कर्मी
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शहर में सिटी ट्रेन चले। ट्रैफिक सिस्टम सुधरे। जिन इलाकों में सीवर लाइन नहीं है, वहां सीवर पड़े। सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगारी दूर करना है। जो विकास को आगे ले जाएगा, हम वोट उसी को देंगे। -करन रत्नाकर
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लोकसभा चुनाव में जाति-धर्म के मुद्दे हवा हो जाएंगे और विकास का मुद्दा प्रभावी रहेगा। जिसने शहर को फोरलेन, अस्पताल, बाईपास दिया। हम अपना वोट तो उसी प्रत्याशी को देंगे।
- अहिवरनलाल, रिटायर्ड आर्मी
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एमए करने के बाद मैं बेरोजगार था। शहर की तरक्की हुई तो नौकरी मिली। मेरी तरह अन्य युवाओं को भी रोजगार मिले। हमारा वोट तो रोजगार दिलाने वाले को मिलेगा।
- कमलेश कुमार