बरेली। करीब 35 हजार 692 वर्ग मीटर से अधिक सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर ग्रीन पार्क पर निर्माण के प्रकरण में सोमवार को सुनवाई के बाद डीएम कोर्ट ने अवैध तरीके से नक्शा पास किए जाने संबंधी सभी प्रामाणिक दस्तावेज हफ्ते भर में पेश करने का बीडीए अफसरों को निर्देश दिया। तहसील को कई चरणों में बनी ग्रीन पार्क नाम की कॉलोनी में दबी नहर, चकरोड, नाली और सड़क की जमीन की फिर से पैमाइश कर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। नहर विभाग को यहां अपने गुम हुए भूभाग का प्रामाणिक ब्योरा प्रस्तुत करना है। मामले में अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।
यह प्रकरण राजेश यादव करीब सात महीने पहले जिला प्रशासन के संज्ञान में लाए थे। तब डीएम अभिषेक प्रकाश ने तहसील स्तर पर जांच कराई तो शिकायत सही पाई। प्रकरण ठंडा पड़ने पर शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की। उसकी सुनवाई नवंबर में पूरी हुई। हाईकोर्ट ने डीएम को सभी पक्षों को सुनकर आदेश प्राप्ति के दो माह के भीतर प्रकरण निस्तारित करने का निर्देश दिया। उसी क्रम में डीएम ने जनवरी में जांच के लिए एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में टीम बनाई। जांच में मिला कि नक्शे में ग्रीन पार्क में गुम दिखाई गई नहर हरुनगला के गाटा 361 में दर्ज है लेकिन मूल राजस्व अभिलेख की जांच में सामने आया कि यह गाटा 361 नहीं बल्कि 36 बटा एक है और उसमें नहर है। अतीत में किसी लेखपाल के स्तर पर यह गड़बड़ी हुई थी।
तहसील की जांच में यह भी मिला कि ग्रीन पार्क में सीलिंग की 29 हजार 920 वर्ग मीटर, नकटिया नदी का 5452 वर्ग मीटर और गूल (सरकारी नाली) का 320 वर्ग मीटर जमीन भी दबा ली गई है। सोमवार शाम को कोर्ट में सुनवाई के दौरान बीडीए सचिव डॉ. गरिमा यादव, एसडीएम सदर रजनीश राय, तहसीलदार गिरीश कुमार झा आदि मौजूद थे।