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भाजपा : चुनाव सिर पर, प्रत्याशी तय नहीं

Tue, 04 Feb 2014 02:36 PM IST
Bareilly
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बरेली। मंडल की लोकसभा सीटों पर काफी समय पहले सपा और बसपा अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है लेकिन भाजपा उम्मीदवारों के नाम तय नहीं कर सकी है। मंडल की अधिकांश सीटों पर अभी खींचतान चल रही है। सांसद मेनका गांधी द्वारा पीलीभीत की ओर रुख करने से आंवला सीट वरुण गांधी और कल्याण सिंह का वरदहस्त प्राप्त दो दावेदारों धर्मेंद्र कश्पय और धर्मपाल सिंह के बीच टिकट की लड़ाई जोर पकड़ रही है। कमोवेश यही स्थिति बदायूं की है। उमा भारती की पार्टी से जीते इकलौते विधायक रामसेवक सिंह ने बसपा में वक्त गुजारने के बाद फिर टिकट के लिए भाजपा का दामन थाम लिया है जबकि शाहजहांपुर में कृष्णा राज के नाम पर पार्टी में सहमति नहीं बन रही है। नरेंद्र मोदी के खास और यूपी के प्रभारी अमित शाह का यह दौरा प्रत्याशी चयन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
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बरेली सीट पर भी तमाम चर्चाओं और आशंकाओं के बीच संतोष गंगवार की दावेदारी मजबूत है। आंवला से सांसद मेनका गांधी इस बार अपने पुराने संसदीय क्षेत्र पीलीभीत जाने का मन बना चुकी हैं। वर्तमान में उनके पुत्र वरुण गांधी यहां से सांसद हैं। वरुण के सुल्तानपुर से चुनाव लड़ने की चर्चा है। आंवला से सबसे पहले पूर्व विधायक धर्मेंद्र कश्यप का नाम तय माना जा रहा था किंतु बाद में कई नाम और जु़ड़ते गए। बदायूं के भगवान सिंह शाक्य और राजीव कुमार सिंह तो आंवला से टिकट चाह ही रहे थे अंतिम दौर में वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह के सहारे आंवला विधायक धर्मपाल सिंह ने अपना दावा ठोंककर पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
भाजपा से टिकट न मिलने पर 2007 का विधानसभा चुनाव उमा भारती की पार्टी से जीते रामसेवक सिंह बसपा में होते हुए हाल फिलहाल भाजपा में लौट आए हैं। पार्टी जिलाध्यक्ष प्रेमस्वरूप पाठक के पुत्र और कस्टम अफसर रहे वागीश पाठक ने भी टिकट के लिए दावा किया है। पिता प्रेमस्वरूप पाठक बदायूं से विधायक रहे चुके हैं। साथ ही एक यादव नेता के नाम की चर्चा भी जोरों पर है।
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मंडल की शाहजहांपुर (सुरक्षित) सीट भी सपा के पास है। यहां से भाजपा की कृष्णा राज पिछला चुनाव हार गईं थीं। इस बार भी वह सशक्त दावेदार हैं। यूं तो कृष्णाराज का टिकट तय माना जा रहा है लेकिन विधायक सुरेश खन्ना इसमें बाधा बने हुए हैं। इस खेमे ने जौहरी लाल को आगे कर टिकट की लड़ाई शुरू करा दी है। पिछले चुनाव में जौहरी लाल का बसपा से लड़ना तय था किंतु अंतिम समय में बसपा ने तत्कालीन विधायक विजय पाल सिंह की पत्नी को मैदान में उतार दिया था।
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