नारी निकेतन
बरेली। राजकीय महिला शरणालय और मानसिक रूप से अविकसित महिलाओं के प्रकोष्ठ। प्रेमनगर में एक ही परिसर में चलने वाली इन दोनों संस्थाओं को लोग नारी निकेतन के नाम से ज्यादा जानते हैं। यहां कभी भी कुछ हो सकता है। देखभाल के लिए परिसर में कोई जिम्मेदार अधिकारी ही नहीं है। संवासिनियों को पढ़ाने के लिए संविदा पर रखी गई गीता रानी ही इस समय यहां की प्रभारी अधिकारी हैं। यहां बीते कुछ वर्षों का रिकार्ड तक नहीं है।
शनिवार को 25 वर्षीय संवासिनी के फंदे पर झूलकर मरने की घटना से सुर्खियों में आए इस परिसर में पूरी व्यवस्था पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। कुल 138 संवासिनियों में से 38 ही दिमागी तौर पर स्वस्थ हैं। ये पहली मंजिल पर शरणालय के कक्षों में रहती हैं। अन्य 100 में से 22 संवासिनियों की मानसिक हालत में सुधार के बावजूद उन्हें भी उसी मंजिल पर रखा जा रहा है। शेष 78 संवासिनियां मेंटली डिसआर्डर श्रेणी की हैं। ये निचले तल के कक्षों में रखी जाती हैं। सुबह शाम इन्हें दवा दी जाती है। सवाल यह कि दवा देता कौन है ? क्योंकि यहां नर्स तक नहीं हैं।
निकेतन के हैरतअंगेज तथ्य यहीं खत्म नहीं होते। सहायक अधीक्षिका रूपींदर सिन गत 24 मार्च से बिना बताए नदारद हैं। 10 जून को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बरेली दौरे से पहले सात जून को वह आईं और चार दिन के अंदर अपने अधिकारियों को सूचित किए बगैर चली गईं। दूसरी ओर, मार्च के अंतिम हफ्ते में मनोविज्ञानी नेमचंद भी बिना बताए चले गए और लौटे ही नहीं। हालांकि वह रहते बरेली शहर में ही हैं। डीएम अभिषेक प्रकाश उनके घर पर तत्काल ड्यूटी ज्वाइन करने का आदेश भी तामील करा चुके हैं।
यहीं नहीं, परिसर में युवा संवासिनियों को मोबाइल तक भेजा जाता है। यह बात ड्यूटी से गायब होने से पहले नेमचंद ने एडीएम को बताई थी। एडीएम से मिलकर उन्होंने बताया था कि बाहर से कुछ अज्ञात लोगों ने युवा संवासिनियों को लक्ष्य कर थ्री जी मोबाइल परिसर में फेंका है। उन्होंने एक संवासिनी के पास से मोबाइल भी मिलने का जिक्र किया था।