बरेली। व्यापार कर अधिकारी के साथ मारपीट के सत्रह साल पुराने एक मुकदमे में सतीश अग्रवाल समेत तीन व्यापारी नेताओं को बुधवार को अदालत ने दो-दो साल कैद और जुर्माने की सजा सुनाई। इसके बाद अपील करने के लिए उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया।
तत्कालीन व्यापार कर अधिकारी रामनाथ ने 16 अगस्त 1995 थाना प्रेमनगर में एफआईआर लिखाई थी। इसमें कहा गया था कि वह 16 अगस्त को अपने कार्यालय में काम कर रहे थे। शाम पौने छह बजे व्यापारी सतीश अग्रवाल, प्रवीण अग्रवाल, दिलीप आर्य, दीपक अग्रवाल, पंकज अग्रवाल आदि असलहे लेकर जबरन उनके दफ्तर में घुस गए। वहां रखी फाइलें फाड़ दीं और उन्हें जातिसूचक गालियां देते हुए उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। पुलिस ने अदालत में सिर्फ मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की। एससी-एसटी एक्ट को भी हटा दिया। बुधवार को अंतिम सुनवाई हुई जिसमें इसमें पीओ वीके यादव ने व्यापारी नेताओं के कृत्य को समाज के लिए खतरनाक बताते हुए उन्हें सख्त सजा देने की अपील की।
प्रवीण अग्रवाल और दिलीप आर्य की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। एसीजेएम षष्ठ बलराज सिंह ने बाकी तीनों आरोपी सतीश अग्रवाल, दीपक अग्रवाल और पंकज अग्रवाल को दो-दो साल की कैद और छह-छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। बाद में तीनों की ओर से दी गई अर्जी पर उन्हें अपील करने के लिए अंतरिम जमानत दे दी गई।
दुराचारी को सात साल की कैद
मीरगंज के गांव गहवरा की एक महिला ने 17 जुलाई 2010 को रिपोर्ट लिखाई थी कि वह रात को घर में सो रही थी। तभी गांव का नन्हें कश्यप तमंचा लेकर घुस आया और धमकाने के बाद उससे दुराचार किया। सरकारी वकील वीरेंद्र वर्मा ने इस मामले में छह गवाह पेश किए। एडीजे आरपी वर्मा ने आरोपी नन्हें को सात साल कैद और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।