बरेली। बैंकों के चक्कर लगाते-लगाते तमाम लोगों की एड़ियां घिस गईं, पर वे एक अदद घर बनाने या वाहन खरीदने के लिए रुपयों का जुगाड़ नहीं कर सके। लेकिन जिला सहकारी बैंक को लोन लेने के लिए ग्राहक ही नहीं मिल रहे हैं। घर बनाने के लिए इस वित्तीय वर्ष में तीन सौ लाख रुपये कर्ज देने का लक्ष्य है और अभी तक सिर्फ 1.20 लाख रुपये ही कर्ज दिया गया है। कई मदों में बैंक के लक्ष्य का यही हाल है।
इसकी वजह पूछने पर टीवी सीरियल लापतागंज की तर्ज पर बैंक मैनेजरों का यही जवाब होता है- ‘किसी ने हमसे मांगा ही नहीं!’ जबकि जिला सहकारी बैंक की जिले में छब्बीस शाखाएं हैं। दरअसल, अब तक साधन सहकारी समितियों के मार्फत ही जिला सहकारी बैंक लोन बांटती रही है। ये समितियां अपने सदस्य किसानों को खाद वगैरह खरीदने के लिए लोन देती हैं। पिछले तीन-चार सालों से बैंक ने होम लोन, नौकरी पेशा लोगों को पर्सनल व वाहन लोन और टैक्सी खरीदने के लिए लोन देने की शुरुआत भी की। इन स्कीमों का प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। नतीजतन, लोगों को यह पता ही नहीं कि ये लोन भी सहकारी बैंक से मिल सकता है। यही वजह है कि आवेदकों की संख्या न के बराबर है। दूसरी बैंकों की तरह ही सहकारी बैंक से भी होम लोन 11.5 फीसदी वार्षिक ब्याज दर पर दिया जाता है। जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक जितेंद्र कुमार का कहना है कि योजनाओं के विज्ञापन के लिए हमारे पास कोई फंड नहीं है। व्यक्तिगत स्तर पर ही स्टाफ प्रचार प्रसार करता है। यही वजह है कि आवेदनकर्ताओं की तादाद कम है।
होम लोन
लक्ष्य : 300 लाख रुपये
बांटा : 1.20 लाख रुपये
सामान (कंज्यूमर ड्यूरेबल) खरीदने के लिए लोन
लक्ष्य : 49 लाख रुपये
बांटा : 40 हजार रुपये
वाहन लोन
लक्ष्य : 10 लाख रुपये
बांटा : सिफर
स्वयं सहायता समूह
लक्ष्य : 86 लाख रुपये
बांटा : 8.96 लाख रुपये