बरेली। जरी नगरी के नाम प्रसिद्घ बरेली में जरी उद्योग और राइस मिल्स को राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया जाएगा। बरेली क्षेत्र को संकुल विकास योजना में जरी नगरी के तहत चुना जाएगा। पूरी योजना का एक ब्लू प्रिंट राज्य और केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। योजना के तहत सरकार की तरफ से उद्यमियों को करोड़ों रुपए की राशि का योगदान दिया जाएगा। जिसमें 25 प्रतिशत उद्यमी को स्वयं वहन करना होगा। जरी व्यवसाय से जुड़े कारीगरों और व्यवसायियों को नई तकनीकी, डिजाइन और नए बाजार के संबंध में शिक्षित किया जाएगा।
संकुल विकास योजना लागू होने के बाद जरी-जरदोजी और चावल के साथ ही मेंथा, बांस, और गन्ना के उत्पादन और उसके बाजार मूल्य को भी बढ़ावा मिलेगा। दरअसल, संकुल विकास योजना के तहत क्षेत्रवार सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे की इकाइयों को क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा है ताकि अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के दौर में वे अपनी उत्पाद क्षमता और गुणवत्ता में व्यापक सुधार ला सकें। प्रदेश की नई औद्योगिक निवेश नीति-2012 में दो श्रेणियों के आधार पर इन इकाइयों को चुना जाएगा। इसमें हार्ड इंटरवेंशन और सॉफ्ट इंटरवेंशन शामिल है। बरेली को सॉफ्ट इंटरवेंशन में शामिल किया जाएगा। राष्ट्रीय आर्थिक परिप्रेक्ष्य में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (एमएसएमई) इकाइयों का रोजगार बढ़ाने, क्षेत्रीय विकास और निर्यात में इसका अहम योगदान है। इस योजना को प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के आधार पर संचालित किया जाएगा। जिससे क्लस्टर के विकास और प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी लाभार्थी उठाएंगे। सूबे में अब तक नौ सॉफ्ट इंटरवेंशन और पांच हार्ड इंटरवेंशन क्लस्टर्स स्वीकृत किए जा चुके हैं। हार्ड इंटरवेंशन में शाहजहांपुर के कालीन उद्योग को भी चुना गया है। संयुक्त निदेशक (उद्योग) विनय कुमार ने बताया, ‘बरेली से योजना का ब्लू प्रिंट केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। जिले में चावल की 20-25 इकाईयां काम कर रही हैं। मेंथा की करीब 105 सूक्ष्म और लघु इकाईयां हैं। जरी जरदोजी से जुड़े कारीगरों को इससे तकनीकी ज्ञान बढ़ाने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर बाजार भी उपलब्ध होगा। बरेली को साफ्ट इंटरवेंशन में रखे जाने की पूरी संभावना है।’
आंकड़ों की जुबानी...
जरी जरदोजी की करीब सात हजार सूक्ष्म और लघु इकाइयां काम कर रही हैं, जिससे 70-80 हजार लोग जुड़े हुए हैं। जरी का कारोबार बरेली के हर चौथे घर में किया जाता है। चावल उद्योग की 20-25 इकाईयां हैं। इससे 1000-1200 लोगों को रोजगार मिलता है। मेंथा व्यवसाय से करीब 105 सूक्ष्म और लघु इकाईयां हैं। इससे पांच हजार व्यवसायी जुड़े हुए हैं।
क्या है संकुल विकास योजना
समूह में लघु उद्योगों के तकनीकी विकास के लिए यह योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत चुने गए व्यवसाय में तकनीकी विकास, बाजार का विकास और वित्त योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके बाद यदि इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी तो कॉमन फैसिलिटी सेंटर, इंडस्ट्रियल पार्क आदि को विकसित करने के लिए 60 प्रतिशत तक की अनुदान राशि दी जाएगी। इसकी अधिकतम सीमा 10 करोड़ तक होगी। बाकी 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार और उद्योग वहन करेंगे।
सेल दूर करेगा समस्याएं
योजना को लागू करने के लिए सर्वे, डायग्नोस्टिक, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाई जाएगी। कॉमन फैसिलिटी सेंटर खोला जाएगा। सेंटर की सेवाओं का शुल्क निर्धारित करने और इम्पैक्ट स्टडी आदि के लिए उद्योग निदेशालय में अलग से सेल गठित किया जाएगा। जरूरत के हिसाब से सेल में निजी परामर्शदाताओं को भी अनुबंधित किया जाएगा।
हस्तशिल्प निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
नई नीति के तहत हस्तशिल्प निर्यात को खासा बढ़ावा मिलेगा। प्रमुख शहरों और कस्बों में औद्योगिक हस्तशिल्प और सेवा क्षेत्र के संकुल समग्र विकास को सुनिश्चित किया जाएगा। अनेक सरकारी योजनाओं, एसाइड योजना, सूक्ष्म और लघु उद्यम क्लस्टर विकास योजना, सूक्ष्म लघु-तकनीकी उन्नयन योजना के अंतर्गत अवस्थापना, बिक्री, डिजाइन और पैकेजिंग आदि सुविधाओं का विकास किया जाएगा।