बरेली। शौचालयों के निर्माण में घपले की तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने सूडा और डूडा के अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की। कोतवाली पुलिस का कहना कि है जांच अधिकारी की तहरीर पर रिपोर्ट नहीं लिखी जा सकती। पुलिस अफसर इस मामले में विधि विशेषज्ञों की राय लेने का मन बना रहे हैं।
मालूम हो कि जिले में 1.71 करोड़ रुपये की लागत से 17,587 शौचालयों का निर्माण होना था लेकिन इनमें से 75 प्रतिशत ही बने। जो बने भी उनकी क्वालिटी बेहद खराब थी। जांच में शौचालयों के निर्माण में घपले की पुष्टि होने पर राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) के संयुक्त निदेशक पीके यदुवंशी ने मंगलवार को कोतवाली में सूडा के तत्कालीन निदेशक चिंतामणि चक्रपाणि, तत्कालीन वित्त नियंत्रक विनोद कुमार श्रीवास्तव, जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के परियोजना अधिकारी एमएल कनौजिया समेत छह एनजीओ के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दी। कोतवाली पुलिस ने इस तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की बल्कि एसएसपी के माध्यम से यह मामला डीएम को भेज दिया है। कोतवाली पुलिस का मानना है कि संयुक्त निदेशक यदुवंशी ने शासन के जिस अधिकारी के आदेश पर जांच की, उन्हीं की तरफ से मामला दर्ज होने के लिए आना चाहिए। उधर, इस मामले में सांसद प्रवीन सिंह ऐरन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।
जांच टीम को लौटना पड़ा था
जिले के 20 नगर निकायों में से 13 में ही जांच हो पाई है। बताते हैं कि कुछ महीने पहले जब टीम यहां आई थी तो दबाव के चलते उसे बीच में ही जांच छोड़कर जाना पड़ा था। सो नगर निगम समेत अन्य सात निकाय में जांच नहीं हो पाई थी। जब बाकी जगह जांच संभव नहीं हो पाई तो उतनी ही जांच पर रिपोर्ट के लिए तहरीर दे दी गई।
अभी मामले को देखा जा रहा है। उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद ही एफआईआर होगी। -शिवसागर सिंह, एसपी सिटी।