बीएलओ की कारस्तानी : किसी के पति का नाम बदला तो किसी के पिता का
- सूची में नाम न मिलने पर बेबस दिखे मतदाता
- विरोध करने पर पुलिस ने सख्ती करके भगाया
बरेली। नगर निगम चुनाव में हजारों मतदाता हिस्सा नहीं ले सके। वजह, मतदाता सूचियों में खामियां। किसी के पिता या पति का नाम बदल दिया गया था, तो किसी का नाम सिरे से ही गायब था। ज्यादातर बूथों पर मतदाता इस तरह की शिकायत करते मिले। उन्होंने विरोध करना चाहा तो वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें खदेड़ दिया।
कोहाड़ापीर के प्राथमिक विद्यालय में दिन में करीब 11 बजे नाजिया वोट डालने पहुंची तो पता चला कि उनके पति का नाम ही गलत दर्ज है। मुजाहिद की जगह मुशाहिद कर दिया गया है। राशन कार्ड में सही नाम दर्ज था, इसलिए मतदान अधिकारी ने उन्हें वोट डालने से रोक दिया। नूरजहां के पति सरताज हैं, लेकिन मतदाता सूची में पति की जगह उनके ससुर मुख्तार का नाम दर्ज कर दिया गया। वह भी इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों को कोसते हुए घर लौटीं। जसोली प्राथमिक विद्यालय में आबिदा कुरैशी अपनी ननद अमरीन के साथ वोट डालने आईं थीं। उनका नाम ही सूची में नहीं मिला। इस वजह से रफत बेगम तो बेहद नाराज दिखीं। कहा, कर्मचारियों को इस लापरवाही की सजा जरूर मिलनी चाहिए। इस मतदान केंद्र पर चुनाव ड्यूटी में लगे एक कर्मचारी ने खुलासा किया कि जनगणना के आंकड़ों से नाम लेकर मतदाता सूची में नाम दर्ज कर दिए गए हैं। सारी गड़बड़ इसी वजह से है।
राजेंद्र नगर इलाके में वार्ड-16 की प्यारेलाल कालोनी, गुलमोहर पार्क, जगदीश विहार, बिहारी लाल कालोनी, राजीव कालोनी के मतदाताओं के नाम भी मतदाता सूची में नहीं थे। गुलमोहर कालोनी के डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि हमारे घर बीएलओ पर्ची देने नहीं गया और विपक्षी पार्टियों ने साजिशन सूची से वोट कटवा दिए हैं। इन्हीं कालोनियों के अतुल अग्रवाल, विपिन गुप्ता, विशेष कुमार, एसपी सिंह, पुष्पा सिंह और नीला सिंह का नाम भी सूची में नहीं था। इस बारे में मतदान केंद्र पर मौजूद बीएलओ से उन्होंने जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने सभी मतदाता सूचियां देखीं। कहा, आपकी तो पूरी कॉलोनी के ही वोट यहां की सूची में नहीं हैं। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी से इस बारे में बात की गई तो वह भी कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं थे। नतीजतन, यहां के लोग बिना वोट डाले ही लौट गए।
वार्ड-11 के तहत संजय नगर, आशापुरम और अशोक विहार जैसे मोहल्लों के सैकड़ों मतदाता पहचान पत्र होने के बाद भी वोट नहीं डाल पाए। क्योंकि उनके भी नाम मतदाता सूची से गायब थे। राजबहादुर,, गोमती देवी, पूजा गुरदीप और विनोद का नाम सूची में शामिल नहीं था। मुलायम सिंह यादव, मनोज वर्मा, हरिओम, किशनलाल, चमेली देवी, धीरेश आर्या, धीरज कुमार और संदीप आर्या भी इसी दिक्कत से रूबरू हुए। वह हैरान और परेशान घूमते रहे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। मनोज वर्मा ने कहा कि इससे तो अच्छा यही रहता कि घर पर आराम से बैठते, धूप में बूथ पर आते नहीं। सिविल लाइंस में भी तमाम लोगों के साथ ऐसा ही हुआ। आकाश ने इस संवाददाता को फोन करके बताया कि उनका नाम ही मतदाता सूची में नहीं है। वह इस मामले में मीडिया कर्मियों की मदद चाहते थे, लेकिन कर्मचारियों और अफसरों से बात करने के बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी। नरकुलागंज, वार्ड नंबर एक में काफी लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं थे। यहां अकील हुसैन, कामरान, अतीक और चंदन वोट डालने गए तो उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। कटरा चांद खां में विनोद वाल्मीकि का पूरा परिवार ही सूची में नाम न हो चलने के चलते वोट नहीं डाला पाया। सूफी टोला में सर्बत उल्ला खां और अकबरी बेगम भी इसी तरह से लौट गईं। महावीर कन्या इंटर कॉलेज में पप्पू वोट डालने गए तो उन्हें पता चला कि पिता का नाम तो सूची में सही दर्ज है, लेकिन उनका नाम राजेश कर दिया गया है। इन सभी लोगों का कहना था कि उन्होंने विधानसभा चुनाव में वोट दिया था, लेकिन निगम की सूचियों में ऐसी खामी होगी, इसकी उम्मीद कतई नहीं थी।