बरेली। नजूल की जमीनों के मामले में हुए खेलों को छिपाने की ही शायद कोशिश है कि जिलाधिकारी के आदेश के तीन महीने बाद भी शहर की नजूल भूमि के सर्वे की एक भी रिपोर्ट नहीं पेश की गई है। इस सर्वे के लिए पांच टीमें बनाई गई थीं लेकिन एक ने भी शुरुआत तक नहीं की। एडीएम एफआर मनोज कुमार ने नायब तहसीलदार, लेखपाल और नगर निगम के संबधित अधिकारी, कर्मचारी के साथ बैठक की तो सभी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने लगे। एडीएम ने इस पर उन्हें सख्त लहजे में हर बुधवार को साप्ताहिक समीक्षा में भाग लेने और रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं।
बुधवार रात हुई इस बैठक में नायब तहसीलदार, नगर निगम के संबंधित अधिकारी कर्मचारी और लेखपाल मौजूद थे। समीक्षा में लेखपाल और नगर निगम के कर्मचारी एक दूसरे पर सहयोग न करने, जमीन का रिकार्ड न देने का आरोप लगाते रहे। इस पर एडीएम ने दोनों को जमकर फटकार लगाई और चेताया कि बहानेबाजी न करें। साथ ही हर सप्ताह किए गए सर्वे की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। अब हर बुधवार को सर्वे की समीक्षा होगी। जो सर्वे नहीं करेगा उसके खिलाफ विभाग से लेकर शासन तक कार्रवाई होगी।
सर्वे रिपोर्ट करेगी बड़ा खुलासा
सूत्रों का कहना है कि नजूल की जमीन का सर्वे पूरा होने और रिकार्ड का मिलान पर सरकारी जमीनों के हेरफेर का बड़ा खुलासा हो सकता है। पूरे प्रदेश में नजूल रिकार्ड कलेक्ट्रेट में रखा जाता है लेकिन बरेली में इसे नगर निगम में रखा गया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि कई मामलों में रिकार्ड तक नहीं मिल रहे हैं। डीएम को शिकायतें भी मिली थीं कि नजूल की जमीनों पर कब्जाकर उनका रिकार्ड गायब करा दिया गया है। इस पर उन्होंने जुलाई में नजूल भूमि का सर्वे करने का आदेश दिया था। हालात यह है कि डीएम का आदेश दरकिनार कर दिया गया और अभी तक सर्वे शुरू ही नहीं हुआ।
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सात कर्मचारियों को नोटिस
बरेली। स्नातक निर्वाचन के मतदान प्रशिक्षण शिविरों से गायब रहे सात कर्मचारियों को हर हाल में दूसरे शिविर में प्रशिक्षण लेने का नोटिस दिया गया है। इन कर्मचारियों को चेताया गया है कि कि अगर वह सात नवंबर को होने वाले मतदान प्रशिक्षण शिविर में भाग नहीं लेंगे तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी।