बरेली। अमन के लिए हब्बू ठेकेदार ने ताजियों के जुलूस को ही कुर्बान कर दिया। दो दिन चलने वाला इस जुलूस में करीब ढाई हजार लोग शामिल होते थे। हब्बू ठेकेदार के बेटे के जुलूस न निकालने का फैसला सुनकर पुलिस ने जहां राहत की सांस ली, वहीं आम लोगों ने अमन के लिए हब्बू की पहल को सराहा है। हब्बू के यहां रखा ताजिया अब मोहर्रम की दस तारीख यानी चार नवंबर को सीधे कर्बला ले जाया जाएगा।
करीब सत्तर साल से निकलने वाले इस जुलूस की जिम्मेदारी तीस साल से हब्बू ठेकेदार के बेटे कमर आलम निभा रहे थे। बृहस्पतिवार को हब्बू ठेकेदार का तख्त, ताजियों और अलम का जुलूस शांतिपूर्वक निकलवाने के लिए पुलिस-प्रशासन ने कड़े प्रबंध किए थे। कमर आलम ने ताजिया बनाकर अपने घर के बाहर रखवा दिया है। आसपास के लोग ताजिए की जियारत करके नजराना पेश कर रहे हैं। मोहर्रम की दस तारीख(चार नवंबर) को ताजिया कमर आलम की अगुवाई में सीधे कर्बला जाएगा। वहां हार और फूलों का दफन करने के बाद जुलूस वापस आएगा।
सद्भावना मंथन का असर
अमर उजाला ने पिछले दिनों नौ दिन तक शहर के प्रबुद्ध लोगों के साथ शहर में सद्भावना पर मंथन किया। इस मंथन में सबसे बड़ा सरोकार शहर के बेहिसाब जुलूस ही थे। हब्बू ठेकेदार का जुलूस रोकना इस मंथन का अब तक का सबसे बड़ा असर है।
फोटो---
जुलूस कम करने होंगे
-शहर में अमन के लिए जुलूसों को कम करने की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही है। हमने इस साल जुलूस न निकालकर कोशिश की है। पुलिस को लिखकर दे दिया है कि हम जुलूस नहीं निकालेंगे।
- कमर आलम
सत्तर साल पुरानी परम्परा को मेरे बेटे ने अमन के लिए कुर्बान किया है। शहर के लोग उनकी इस कोशिश को सराह रहे हैं। शहीदाने कर्बला को याद करने के और भी तरीके हैं। उनके घर के आगे ताजिया रखा है, लोग उसकी जियारत कर रहे हैं। अगली साल देखा जाएगा- हब्बू ठेकेदार