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ऐसा करना है जिंदा रहने का अहसास हो

Sun, 26 Oct 2014 05:34 AM IST
Bareilly
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बरेली। फिल्मी दुनिया में उनका कोई गॉड फादर नहीं था लेकिन लगन और मेहनत ने मकाम पर पहुंचा ही दिया। बरेली के बिहारीपुर की कविता सेठ आज वह फिल्मी गायिकाओं में अपना अलग स्थान बना चुकीं हैं। स्टेज शो भी कर रही हैं और अब कुछ ऐसा करना चाहती हैं जो ताउम्र सचमुच जिंदा रहने का अहसास रहे और उसके बाद भी लोग याद रखें।
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कविता सेठ अपनी नई एलबम ट्रांस विद् खुसरो के प्रमोशन के लिए दिल्ली आई थीं और दीवाली मनाने अपने घर बरेली चली आईं। यहां स्टेशन के निकट अपने निवास पर अमर उजाला से बातचीत में बोली-कुछ अलग हटकर करने का इरादा था इसलिए वह सूफी कलाम पर काम कर रही हैं। फिलहाल ईरान के मौलाना रूमी के कलाम को लेकर काम कर रहीं हूं। कोशिश है कि वह मौलाना रूमी के कलाम के माध्यम से उन्हें भारत में इंट्रोड्यूज करें। इसके अलावा अलग-अलग शायरों की नज्मों को लेकर काम करना शुरू किया है। इसमें गुलजार, अमृता राव और अल्लामा इकबाल, साहिल लुधियानवी, जोश मलीहाबादी के साथ बरेली के प्रोफेसर वसीम बरेलवी जैसे शायरों के नाम भी हैं।

ट्रांज विद् खुसरो जल्द होगी रिलीज
नई एसबम ट्रांज विद् खुसरो के बारे में कविता सेठ कहती हैं सूफियाना डांस म्युजिक को मिला कर उसकी प्योरिटी को बरकरार रखते हुए तैयार करना बहुत कठिन था। सूफियाना में रॉक और फ्यूजन तो बुहत बने हैं मगर ट्रांज पहली बार बना हैं। दरअसल यह एलबम उनके 18 वर्षीय पुत्र कनिष्ठ सेठ की पहल पर बनी है। कनिष्ठ अमीर खुसरो कलाम को लेकर छोटे कम्पोजीशन बना रहे थे अचानक से उन्हें लगा कि इस पर काम हो सकता है। उन्होंने अपनी मां बात कीा। कोशिश हुई और एलबम तैयार हो गई। इसे तैयार करने में चार साल लग गए।
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बरेली की बेटी है
1970 में बिहारीपुर में जन्मी कविता ने शुरूआती दौर में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ग्वालियर घराने के एनडी शर्मा से प्राप्त की। साहू राम स्वरूप महिला महाविद्यालय से संगीत में स्नातक किया। शादी के बाद दिल्ली में उस्ताद इकबाल अहमद से गायकी सीखी।
फिल्म फेयर एवार्ड
वेकअप सिड के सांग इकतारा.... के लिए कविता को 2010 में बेस्ट फीमेल प्ले बैक सिंगर का एवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा इसी गीत के लिए स्टार स्क्रीन एवार्ड, इंटरनेशनल इंडियन फिल्म अकादमी अवार्ड आदि से भी नवाजा जा चुका है।
कविता के हिट
वादा में- जिंदगी को संवार दे मौला...., गैंगस्टर में- मुझे मत रोको मुझे यार के घर जाने दो...., कॉकटेल में- तुम्हीं हो बंधु सखा तुम्हीं हो...., राजनीति में- मेरा पिया मोसे बोलत नाहीं.... कुल मिला कर अब तक वह 50 गीत गा चुकी हैं।

खानकाह नियाजिया में दी हाजरी
बरेली आईं तो खानकाह नियाजिया में सज्जादानशीन शाह हसनी मियां और शब्बू मियां से मुलाकात कर अपनी नई एलबम के लिए दुआ कराई और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। उनका कहना है कि खानकाह से बचपन से उनका लगाव रहा है। वह अपने पिता के साथ वहां हाजिरी देने जाया करती थी। खानकाह से बहुत बहुत कुछ मिला है।
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