बरेली। देव गुरू बृहस्पति 29 मार्च को रात 8.13 बजे वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में गोचर करेंगे। देव गुरू का धनु राशि में आना ज्योतिष क्षेत्र मेें बेहद शुभ माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह परिवर्तन आगामी 22 अप्रैल तक रहेगा। जिसके बाद वापस वक्री होकर गुरू वृश्चिक राशि में चले जाएंगे। इस दौरान देवगुरु की स्थिति का भावानुसार राशियों पर प्रभाव दिखाई देगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि देव गुरु बृहस्पति का ज्योतिषशास्त्र में अहम स्थान है। यह संतान, ज्ञान, धर्म व दर्शन के कारक हैं। उन्होंने बताया कि गुरु ग्रह को धनु व मीन राशि का स्वामित्व प्राप्त है। यह कर्क राशि में उच्च और मकर राशि में नीच के होते हैं। कुंडली में बृहस्पति के बलवान होने पर जातक का परिवार, समाज और हर क्षेत्र में प्रभाव रहता है। बृहस्पति के प्रभाव से जातक का मन धर्म एवं आध्यात्मिक कार्यों में अधिक लगता है। इसके अलावा जातक को करियर में उन्नति, स्वास्थ्य लाभ, मजबूत आर्थिक स्थिति, विवाह एवं संतानोत्पत्ति जैसे शुभ फल प्राप्त होते हैं।
गुरू की शत्रु, मित्र और सम राशियां
ज्योतिषाचार्य ने बताया इस गोचर का प्रभाव देवगुरू की मित्र राशि मेष, वृश्चिक, सिंह, कर्क पर सकारात्मक, शत्रु राशि मकर, मिथुन, कन्या, तुला, वृष पर नकारात्मक और कुंभ, मीन पर सम प्रभाव दिखाई देगा। धनु राशि गुरू की अपनी राशि है, इसलिए धनु राशि के जातकों पर विशिष्ट प्रभाव दिखाई देंगे।
भाव और राशियों पर प्रभाव
मेष - नवम भाव में होगा। पारिवारिक जीवन सकारात्मक रहेगा।
वृष - अष्टम भाव में होगा। आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें।
मिथुन - सातवें घर में होगा। तनाव होगा। आर्थिक स्थिति संवरेगी।
कर्क - षष्टम भाव में होगा। संघर्ष के बाद सफलता मिलेगी।
सिंह - पांचवे भाव में होगा। आर्थिक योजनाएं कारगर होगी।
कन्या - चतुर्थ भाव में होगा। परिजनों से विवाद हो सकता है।
तुला - तृतीय भाव में होगा। मानसिक शांति, मन स्थिरता रहेगा।
वृश्चिक - द्वितीय भाव में होगा। आर्थिक क्षेत्र प्रबल रहेगा।
धनु - इसी राशि में रहेगा। गुरू की कृपा हर क्षेत्र में रहेगी।
मकर - द्वादश भाव में होगा। धार्मिक कार्य में धन व्यय होगा।
कुंभ - एकादश भाव में होगा। कार्यक्षेत्र में तरक्की मिलेगी।
मीन -दसवें भाव में होगा। अर्थ व स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा।