बहेड़ी। उत्तराखंड सीमा के गांव जुगनूनागर और भाटिया फार्म के आसपास बाघ की मौजूदगी की खबर पर वन विभाग ने अपने जिन ‘एक्सपर्ट्स’ की टीम भेजी, उन्होंने मौके पर पगमार्क देखकर उन्हें कुत्ते का बता डाला। इस पर ग्रामीण बौखला गए, उन्होंने इलाके में नीलगायों के मारे जाने की बात कहते हुए हंगामा शुरू कर दिया। यह भी दावा किया कि उन्होंने नदी किनारे बाघ को खुद आते-जाते देखा है। अब इस बारे में शिकायत डीएम से की गई है।
किच्छा नदी के तलहटी में भाटिया फार्म और जुगनूनागर गांव बसे हुए हैं। करीब दस दिनों से जंगल में लगातार नील गायों के शव मिल रहे थे। लोगों ने बताया कि रात को बाघ के गुर्राने की आवाजें भी आती हैं। बाघ की आमद से इन दो गांवों के अलावा अंजनिया, दोपहरिया, पंथपुरा गांव तक के ग्रामीण दहशत में हैं। आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारियों ने मामले को हल्के में लेते हुए कुछ वन रक्षकों को मौके पर जांच के लिए भेजा। वन रक्षकों ने बगैर ठीक से जांच किए ही पगमार्क को कुत्ते के बता डाला तो ग्रामीण भड़क उठे। उन्होंने पूछा बालिश्त भर चौड़े निशान कौन से कुत्ते के होते हैं। लोगों के हंगामे के बाद वन रक्षक लौट गए। उधर, आरएसएस के जिला संघ चालक शशांक भाटिया ने डीएम वीरेंद्र सिंह से मामले की शिकायत की। उन्होंने लखनऊ में भी अफसरों को जानकारी दी है। उधर, वन विभाग के एसडीओ आरबी सिंह और डीएफओ भरत लाल ने भी फोन पर हुई बातचीत में इलाके में बाघ न होने का दावा किया।
वन विभाग को संजीदगी से काम करना चाहिए। यह लोगों की जानमाल से जुड़ा हुआ मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी।
- वीरेंद्र सिंह, डीएम