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विधायकगण ने काम नहीं कराए.. मगर फिलहाल तो सांसद जानें

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बरेली। भाजपा के विधायकों को या तो यह यकीन है कि विकास कार्यों से वोट नहीं मिलते या फिर उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि उनके कराए विकास कार्यों का लाभ आने वाले लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी के प्रत्याशी को मिले। संत कबीरनगर के भाजपा सांसद के अपनी ही पार्टी के विधायक को जूतों से पीटने की ताजा घटना के पीछे यही कारण रहा और विधायकों का यही रवैया बरेली में भी है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधायकों को बतौर त्वरित विकास निधि पांच-पांच करोड़ की बड़ी रकम विकास कार्यों के लिए दे डाली, लेकिन दूसरी तरफ हाल यह है कि जिले के विधायक पिछले दो सालों में बतौर विधायक निधि मिली चार-चार करोड़ में से ही करीब साठ फीसदी रकम नहीं खर्च पाए हैं।
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डीआरडीए बरेली में जिले के नौ विधायकों और पांच एमएलसी की निधि का पैसा आता है। ये सभी विधायक भाजपा के हैं। लापरवाही की हाल यह है कि सभी भाजपा विधायकों की दो साल की निधि की धनराशि से प्रस्तावित 60 फीसदी से ज्यादा काम अब तक नहीं शुरू करा पाए हैं। यही हाल पांच विधान परिषद सदस्यों की निधि का भी है। सरकारी सिस्टम की धीमा चाल से जनता के नुमाइंदे कितने बेखबर हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार्यदायी संस्था ने ही दो साल की विधायक निधि की 10.15 करोड़ से ज्यादा रकम अपने पास रोक रखी है। फिर भी विधायकों की ओर से उस पर काम शुरू कराने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है।

वर्ष 2017-18- साल भर में होने थे 14.3 करोड़ के काम
धर्मपाल सिंह, राजेश अग्रवाल, डॉ. अरुण कुमार, छत्रपाल गंगवार, केसर सिंह, डॉ. डीसी वर्मा, राजेश कुमार मिश्रा, बहोरनलाल मौर्य, डॉ. श्याम बिहारी लाल के अलावा एमएलसी संजय कुमार मिश्रा, जयपाल सिंह व्यस्त, घनश्याम सिंह लोधी, डॉ. वसीम बरेलवी और एसआरएस यादव की विधायक निधि से 333 काम स्वीकृत हुए थे। इनकी लागत 14.30 करोड़ थी। डीआरडीए ने इन कामों में इतनी शिथिलता बरती कि एक साल के काम में दो साल बीतने के बाद भी मात्र 8.33 करोड़ रुपये ही खर्च किए। वह भी आनन-फानन में। कार्यदायी संस्था ने 138 काम शुरू तक नहीं किए। केवल फाइलों में उनकी प्रगति दर्शाकर आंकड़ों के खेल में सबको उलझाए रखा। बीते साल की 2.85 करोड़ की रकम में तो हाथ तक नहीं लगा। जिन कामों की प्रगति दर्शायी गई है, वह भी 70 फीसदी से ज्यादा अधूरे हैं।
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वर्ष 2018-19- 14.14 करोड़ में से सिर्फ 1.40 करोड़ ही खर्च हुए
इन विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की निधि से 264 काम स्वीकृत किए गए। इनकी लागत 14.14 करोड़ से अधिक थी, इनमें से डीआरडीए से मात्र 8.71 करोड़ की धनराशि अवमुक्त हो पाई। आरईडी अब तक 1.40 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाया। अब तक 208 काम तो शुरू भी नहीं हो पाए हैं। कार्यदायी संस्था 7.30 करोड़ से ज्यादा की रकम पर चुपचाप कुंडली मारे बैठी है। उधर, विधायक निधि खर्च करने के मामले में अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। माननीय भी खामोश हैं।
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