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मूल्यांकन में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों की होगी नो एंट्री

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बरेली। कोटे की कॉपियां जल्दी जांचने के चक्कर में परीक्षक अक्सर लापरवाही करते हैं, जिसका खामियाजा छात्रों को फेल होकर चुकाना पड़ता है। पिछले साल कई ऐसे मामले सामने आए। चैलेंज इवैल्यूएशन में भी जब कई फेल छात्र पास हुए तो परीक्षकों को पोल खुली थी। इस पर विश्वविद्यालय की भी खूब फजीहत हुई थी। इस बाद किरकिरी न हो इसलिए मूल्यांकन में परीक्षकों की ड्यूटी लगाने में एहतियात बरता जा रहा है। जिन परीक्षकों के मूल्यांकन पर ज्यादा शिकायतें आईं थी, इस बाद उनसे कॉपियां चेक नहीं कराई जाएंगी।
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दरअसल पिछले साल से ही विश्वविद्यालय में चैलेंज इवैल्यूएशन शुरू हुआ। मुख्य परीक्षाओं के रिजल्ट आने के बाद चार हजार से ज्यादा छात्रों ने आरटीआई के तहत अपनी कॉपियां देखीं। 750 से ज्यादा ने मूल्यांकन को चुनौती दी, जिसमें 65 से ज्यादा छात्र पास हुए, लेकिन नियमानुसार 14 फीसदी अंक नहीं बढ़ पाने तो उन्हें फेल ही माना गया। जबकि वह पास थे। ऐसे तमाम छात्रों ने विश्वविद्यालय में शिकायत दर्ज कराकर मूल्यांकन पर सवाल उठाए थे। अब 25 फरवरी से मुख्य परीक्षाएं शुरू होनी हैं। मार्च में मूल्यांकन शुरू होगा। विश्वविद्यालय पिछले साल की गलती दोहराना नहीं चाहता। जिन कॉपियों के मूल्यांकन पर ज्यादा सवाल उठे, उनके परीक्षकों की सूची अलग बनवाई जा रही है ताकि इस बार उनको मूल्यांकन से दूर रखा जा सके। वैसे हर साल मूल्यांकन के लिए तमाम विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से परीक्षक आते हैं। कॉलेज का पत्र देखने के बाद उनको मूल्यांकन की अनुमति दे दी जाती है।
परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार का कहना है कि मूल्यांकन में लापरवाही करने वाले परीक्षकों से इस बार मूल्यांकन नहीं कराया जाएगा। कई परीक्षकों के मूल्यांकन पर सवाल उठे हैं। अनुभवी शिक्षकों को ही मूल्यांकन का मौका दिया जाएगा।
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