बरेली। कमिश्नर की मंजूरी के इंतजार में 29 करोड़ रुपये के विकास कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं। नगर निगम को यह राशि 14वें वित्त आयोग और अवस्थापना निधि के तहत मिली है। मेयर उमेश गौतम का कहना है कि अगर समय से मंजूरी नहीं मिली तो 42 विकास कार्य आचार संहिता में फंस जाएंगे।
नगर निगम को 14वें वित्त आयोग के तहत 23 करोड़ और अवस्थापना निधि के तहत छह करोड़ रुपये मिले हैं। इस राशि से सड़क, नाली-नाला, सौंदर्यीकरण आदि के सौ से अधिक विकास कार्य होने हैं, लेकिन इसके लिए कमिश्नर रणवीर प्रसाद की मंजूरी का इंतजार है। इसमें 24 विकास कार्य 14वें वित्त आयोग और 18 अवस्थापना निधि से होने हैं। नगर निगम की ओर से बैठक की तिथि निर्धारित करने के लिए कमिश्नर को पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन उन्होंने अब तक कोई तिथि तय नहीं की है। ऐसे में निगम अफसर चिंतित हैं क्योंकि कुछ समय बाद आचार संहिता लग जाएगी। अगर समय से इन कार्यों को मंजूरी नहीं मिली तो टेंडर प्रक्रिया भी नहीं हो सकेगी। ऐसे में यह बजट शासन को वापस हो जाएगा और विकास कार्य लटक जाएंगे।
टेंडर प्रक्रिया में भी लगेगा 15 दिन का समय
निगम अफसरों की मानें तो बैठक में कमिश्नर की मंजूरी के बाद इन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। टेंडर निकलने से लेकर उनकी मंजूरी और वर्क ऑर्डर जारी होने तक कम से कम 15 दिन का समय लगेगा। ऐसे में समय रहते इनकी मंजूरी जरूरी है।
स्मार्ट सिटी को लेकर भी मच चुका है घमासान
पूर्व में स्मार्ट सिटी के कामों को लेकर भी घमासान हो चुका है। पिछले दिनों स्मार्ट सिटी की बैठक में कमिश्नर ने निगम की ओर से रखे गए चारों प्रस्तावों पर जांच की बात कहते हुए रोक लगा दी थी। इसके बाद मेयर ने आरोप लगाए थे कि प्रशासनिक अफसर विकास कार्यों में बाधा पैदा कर योगी सरकार के कामों में अड़ंगा लगा रहे हैं।
नगर निगम को 14वें वित्त आयोग और अवस्थापना निधि से 29 करोड़ रुपये का बजट मिला है। बैठक के लिए कमिश्नर को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन उन्होंने अब तक कोई तिथि तय नहीं की है। देरी होने पर आचार संहिता के चलते यह विकास कार्य फंस जाएंगे। - उमेश गौतम, मेयर