बरेली। सालभर सोए रहे। अब लोकसभा चुनाव अचार संहिता लगने वाली है तो शासन की नींद टूटी है। किसान सम्मान योजना, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास, सांसद और विधायक त्वरित विकास निधि के काम आनन-फानन में निपटाने की कवायद शुरू हो गई है। अफसर और कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ गया है। नतीजतन कलक्ट्रेट और विकास भवन में महीने के दूसरे शनिवार को भी सरकारी दफ्तर खुले रहे।
विकास भवन में महीने के दूसरे शनिवार को अक्सर दफ्तर बंद मिलते हैं। मगर, अब चुनावी माहौल शुरू हो चुका है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने में एक माह से भी कम समय बचा है। ऐसे में अधूरे कामों को पूरा करने का दबाव है। किसान सम्मान योजना में दो हेक्टेयर जोत वाले 2.60 लाख किसानों के बैंक खातों में 2000 हजार रुपये भेजने के लिए आवेदन आ चुके हैं। इनको हफ्तेभर में किसानों से भरवाकर ऑनलाइन डाटा फीडिंग का काम शुरू हो गया है। कृषि विभाग के कर्मचारी अमित वर्मा का कहना है कि उनका स्टाफ तो अवकाश के दिन भी सुबह सात बजे ही आ गया था। रात आठ बजे काम खत्म कर पाया। छुट्टी बेकार चली गई। रविवार को भी आना पड़ेगा। डीआरडीए में पियूष कुमार भी अवकाश के दिन ऑफिस खोलकर कंप्यूटर पर सांसद और विधायक निधि के कामों को पूरा करने में जुटे रहे। पंचायती राज अधिकारी विनय कुमार सिंह का कहना था कि शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा करना है, इसलिए अब अवकाश का कोई मतलब नहीं है। हर दिन काम करना है। समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित और सीडीओ सत्येंद्र कुमार पूरे दिन भोजीपुरा में सामूहिक विवाह कराने में लगे रहे।