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अब और बहानेबाजी नहीं.. लगाने ही होंगे परीक्षा केंद्रों पर कैमरे

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बरेली। राजकीय इंटर कॉलेजों की तरह राजकीय डिग्री कॉलेजों ने भी बजट का रोना रोकर परीक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और वायस रिकॉर्डर नहीं लगाए। विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी नेे इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। अब शासन स्तर से ही राजकीय कॉलेजों पर नकेल कसी जा रही है। वित्त नियंत्रक उच्च शिक्षा अरुण सिंह ने प्रदेश के सभी राजकीय कॉलेजों को पत्र जारी कर कैमरे और वॉयस रिकॉर्डर लगाने की सूचना मांगी है। परीक्षा के लिए कैमरे लगाने ही होंगे।
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दरअसल, शिक्षा मंत्री ने इस बार यूपी बोर्ड की परीक्षा के साथ विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में भी परीक्षा कक्षों में दोनों साइड कैमरे और वॉयस रिकॉर्डर लगाने के निर्देश दिए। विश्वविद्यालय ने कॉलेजों को 31 दिसंबर तक का वक्त दिया। कुछ प्राइवेट कॉलेजों और अनुदानित कॉलेजों ने तो कैमरे लगाने की व्यवस्था की, लेकिन राजकीय कॉलेजों ने हाथ खड़े कर दिए। कई कॉलेजों ने तो विश्वविद्यालय को लिखकर भेज दिया कि उन्हें कैमरे लगाने को बजट दिलाया जाए। शासन की मंशा है कि हर हाल में परीक्षा सीसीटीवी की निगरानी में होगी। वित्त नियंत्रक उच्च शिक्षा ने प्रदेश के सभी महाविद्यालयों को पत्र जारी कर सारी सूचनाएं तीन दिन में मांगीं हैं। इसमें किस कॉलेज में कितने कैमरे लगे, कितने कक्षों में कैमरे और वायस रिकॉर्डर लगे, अगर नहीं लगे तो उसका मांगपत्र शासन को भेजा या नहीं।

इस बार जल्दी हो सकती हैं विवि की परीक्षाएं
लोकसभा चुनाव के चलते इस बार यूपी बोर्ड के साथ सीसीबीएसई की परीक्षाएं मार्च के बजाए इस बार फरवरी में ही शुरू हो रही हैं। विश्वविद्यालय भी परीक्षाएं पहले निपटाने के मूड में है। स्नातक और परास्नातक की मुख्य परीक्षाएं फरवरी में शुरू हो सकती है। इस बार परीक्षा कार्यक्रम भी तीन माह का नहीं होगा। परीक्षाएं जल्दी निपटाई जाएंगी।
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