नई दिल्ली से डिब्रूगढ़ जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस इंक्वायरी की उद्घोषणा के बिना ही जंक्शन पर खड़ी हो गई। अचानक ट्रेन आने से वीआईपी यात्रियों को भागकर कोच में जाना पड़ा। आरोप है कि स्टेशन मास्टर इंक्वायरी स्टाफ को ट्रेनों की जानकारी देने में आनाकानी करते हैं।
जिस वीआईपी ट्रेन पर रेलवे बोर्ड की मानीटरिंग रहती है, उसके जंक्शन के स्थानीय अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। ऐसा इंक्वायरी और स्टेशन मास्टर स्टाफ के सामजस्य न होने से है। अन्य ट्रेनों की भी रोजाना यही स्थिति रहती है। इंक्वायरी बाबू कई बार स्टेशन मास्टर पर ट्रेनों की जानकारी न देने शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन कार्रवाई न होने का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि राजधानी एक्सप्रेस के सीबी गंज से चलने पर स्टेशन मास्टर ने जंक्शन को ट्रेन के पास होने की सूचना दी थी, लेकिन स्टेशन मास्टर ने लापरवाही बरतते हुए इंक्वायरी आफिस को नहीं बताया। आमतौर पर सीबी गंज स्टेशन से ट्रेन गुजरने पर जंक्शन पर एनाउंसमेंट शुरू हो जाता है, लेकिन छह सितंबर को ऐसा नहीं हुआ। छह सितंबर को दोपहर 1.55 बजे में प्लेटफार्म पर आकर खड़ी हो गई। कोच डिस्प्ले सिस्टम खराब होने से यात्रियों को कोच की लोकेशन भी नहीं मिल सकी जिससे उन्होंने भागते दौड़ते कोच में पहुंचे।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है
डिप्टी स्टेशन अधीक्षक या स्टेशन मास्टर के इंक्वायरी बाबुओं को ट्रेन की लोकेशन न देने का मामला पहली बार नहीं है। इंक्वायरी सूत्रों का कहना है कि जंक्शन से चलने वाली ट्रेन मुगलसराय, त्रिवेणी एक्सप्रेस, दादर, बरेली वाराणसी एक्सप्रेस के चलने के समय की जानकारी उन्हें नहीं मिलती है, यात्री इंक्वायरी पर हंगामा काटते रहते हैं, कई बार पूछने पर स्टेशन मास्टर उन्हें ट्रेन चलने का समय बताते हैं। इसी सप्ताह लखनऊ मेल और जनता एक्सप्रेस के मामले में भी ऐसा हुआ। दोनों ट्रेनें आ गई लेकिन इंक्वायरी पर ट्रेनों को कोई अता-पता नहीं था। एनटीईएस (नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम) भी एक महीने से खराब है। इस संबंध में मुरादाबाद डिवीजन के एडीआरएम शरद श्रीवास्तव ने भी कुछ नहीं बताया जबकि स्टेशन अधीक्षक सत्यवीर सिंह का फोन आउट आफ रेंज था।