केमिस्ट और फार्मासिस्ट लाइसेंस ऑनलाइन करने के खिलाफ बरेली रिटेल केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है। केमिस्ट चाहते हैं कि फार्मासिस्ट की बाध्यता को खत्म किया जाए। वहीं कानपुर में रविवार को सूबे के केमिस्ट मंथन के लिए इकट्ठा हो रहे हैं। यहां उठने वाले मुद्दों को केंद्र सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
बरेली रिटेल केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लागू लाइसेंस की नई प्रक्रिया में जनपद की करीब दस हजार रिटेल दुकान बंदी की कगार पर पहुंच रही हैं। साफ है कि पंद्रह हजार रिटेल शॉप के सापेक्ष फार्मासिस्ट एक तिहाई हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद छोटे केमिस्ट दुकानदारों के व्यवसाय बंद हो सकते हैं। जो फार्मासिस्ट केमिस्ट स्टोर से जुड़े हैं वह भी निजी दवा कंपनियों में नौकरी करते हैं। अब आधार से लिंक होने के बाद कंपनी से नौकरी छोड़कर दुकान से जुड़ने पर मोटी तनख्वाह चाहेंगे, जोकि दुकानदारों के लिए देना संभव नहीं होगा। यही वजह है कि फार्मासिस्ट की बाध्यता को खत्म करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दाखिल की जानी है। इसके अतिरिक्त सूबे के केमिस्ट 19 अगस्त को कानपुर में आयोजित बड़ी सभा में अपना पक्ष रखेंगे।
उधर, केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी का कहना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां भी दूर होंगी। उन्होंने बताया कि वह भी कानपुर की बैठक में हिस्सा लेंगे। केमिस्टों को होने वाली समस्याओं को मजबूती से रखा जाएगा। न्यू डिस्ट्रिक्ट बरेली केमिस्ट एसोसिएशन के महासचिव सतीश सेठी ने कहा कि अचानक प्रक्रिया लागू करने से उठने वाली समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने के लिए केमिस्ट कानपुर में इकट्ठा हो रहे हैं।