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सीबीएसई को सताई छोटे बच्चों की फिक्र

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छोटे बच्चों पर पढ़ाई के बढ़ते बोझ से चिंतित सीबीएसई का आदेश
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हेडिंग- कक्षा दो तक के बच्चों को बस्ता, होमवर्क से रखें मुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। आजकल बच्चे ठीक से अपने पांवों पर अपना बोझ नहीं संभाल पाते तब तक उनकी पीठ पर बस्ते का बोझ लाद दिया जाता है। ढाई साल की उम्र से ही बच्चे नंबरों की दौड़ में शामिल हो जाते हैं। इससे न केवल उनके मानसिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है, बल्कि उनके कंधे भी कमजोर होने लगते हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को अब बच्चों की सेहत की फिक्र सताने लगी है। बोर्ड ने सभी स्कूलों को फरमान जारी किया है कि कक्षा एक और दो के बच्चों की पीठ पर न तो बैग लादा जाए और न उन्हें होमवर्क दिया जाए।
इस संबंध में सबीएसई 2004, 2007 और 2016 में भी आदेश जारी कर चुका है, लेकिन स्कूल अपनी ही चलाते रहे। बरेली के स्कूलों को देखें तो यहां कक्षा दो तक के बच्चों को होमवर्क भी दिया जाता है और भारी बैग भी उनकी पीठ पर लादा जाता है। उनका सिलेबस ही तीन से चार हजार तक का आता है। स्कूलों का ये तर्क है कि होमवर्क के लिए अभिभावक ही कहते हैं। उनका कहना है बच्चे को होमवर्क नहीं दिया जाएगा तो पढ़ाई उसकी आदत में नहीं आएगी जबकि बैग और होमवर्क का लोड कई बार बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित होता है। अब फिर से सीबीएसई ने स्कूलों को नो बैग और नो होमवर्क का आदेश जारी किया है। कक्षा एक और दो के बच्चों पर होमवर्क का लोड न डाला जाए। आदेश जारी होने के बाद स्कूल इसे लागू कराने पर मंथन कर रहे हैं, क्योंकि वर्तमान समय में बच्चों को स्कूल बैग भी लाने को कहा जाता है और होमवर्क भी दिया जाता है। होमवर्क न करने पर बच्चों की डांट फटकार भी होती है।
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वर्जन
कक्षा एक और दो के बच्चों के लिए नो बैग-नो होमवर्क का आदेश सीबीएसई ने जारी किया है। नो बैग के लिए प्लानिंग करनी होगी तभी इसे लागू करा पाएंगे। होमवर्क पहले से ही कम दिया जा रहा है। सीबीएसई ने जो भी निर्देश दिए हैं, उनको लागू कराया जाएगा। - दीपक अग्रवाल , सिटी कोआर्डिनेटर सीबीएसई
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कक्षा एक और दो के बच्चों को पहले से ही कम होमवर्क दिया जाता है। अभिभावक ही दबाव बनाते हैं कि बच्चे को होमवर्क दिया जाए। फिलहाल सीबीएसई के आदेश का पालन किया जाएगा। - पारुष अरोड़ा, अध्यक्ष इंडिपेेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
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