बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालय में भी जुगाड़ से काम हो रहा है। स्कूलों में बच्चाें की यूनिफार्म का पैसा तीन जुलाई को भेजा गया है, जबकि एक जुलाई को ही कई स्कूलों में ड्रेस बंट चुकी है। शिक्षकों और अधिकारियों के जुगाड़ से बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों और मुख्य अतिथियों ने इसका शुभारंभ कर दिया, जबकि स्थिति ये है कि देर से पैसा आने पर अभी तक कई स्कूलों में ड्रेस बंटी ही नहीं है।
जिले के 15 ब्लॉक में ड्रेस बनाने का काम चल रहा है। हर ब्लॉक में एक से दो ड्रेस बनाने वाले हैं जो हर साल बेसिक शिक्षा विभाग का ठेका ब्लाक स्तर पर लेते हैं। इस बार भी ठेका लेने के लिए कोशिशें चलती रहीं। भले ही शिक्षक कितना कहते रहें कि एक बच्चे की दो ड्रेस 400 रुपये में नहीं बन सकती, लेकिन फिर भी ड्रेस बनाने का ठेका प्राप्त करने के लिए खूब सिफारिशें लगवाई गईं। इसी का परिणाम रहा कि एक जुलाई को बच्चाें की ड्रेस बनकर आ गई, जबकि सिलाई और कपड़ा खरीद का कोई पैसा शिक्षकाें की समिति तक पहुंचा ही नहीं था। शहर के कई शिक्षकों के पास धनराशि पहुंचने का मैसेज तीन जुलाई को आया।
अभी भी गायब हैं स्कूलाें से किताबें
एक जुलाई को स्कूलों का शुभारंभ हुआ तो मात्र कक्षा चार की चार किताबें बरेली में थीं। दूसरे चरण में कक्षा सात की रेनबो, महान व्यक्तित्व, हमारा इतिहास, पृथ्वी हमारी, कक्षा चार की कलरव, गिनतारा, परख व हमारा परिवेश भेजी गई। तीसरे चरण में कक्षा दो और तीन की सिर्फ कलरव आई। इस समय कक्षा एक की कलरव, तीन की रेनबो, कक्षा पांच की कलरव और गिनतारा व कक्षा 8 की पृथ्वी हमारी, महान व्यक्तित्व, कृषि व गृह शिल्प की किताबाें का सत्यापन हो रहा है। उर्दू की किताब आई ही नहीं है।