भोजन पैकेट के लिए रही मारामारी
गोष्ठी में अव्यवस्थाएं सिर चढ़कर बोलीं। इसके कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। अपराह्न तीन बजे कृषि मंत्री का भाषण समाप्त होते ही ऑडिटोरियम हॉल से किसान बाहर निकलने लगे। गेट पर किसानों के लिए भोजन पैकेट वितरण की व्यवस्था थी। भीड़ बढ़ी वहां छीना-झपटी होने लगी थी। महिला किसान तो वहां तक पहुंचने की हिम्मत ही नहीं जुटा सकीं। टैंकर के गर्म पानी ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी।
कई किसान भोजन के पैकेट साथ लेकर चले गए। बिजनौर से आए किसान राकेश सिंह ने कहा कि दोपहर 12 बजे से हॉल में बैठे-बैठे परेशान हो गए। वहां पानी तक की व्यवस्था नहीं थी। राकेश ने कहा, छीना-झपटी के बाद भोजन पैकेट मिला है। यहां पानी की सुविधा नहीं है तो उसे कहीं बाहर खाएंगे। उर्मिला ने कहा, इतनी भीड़ को पार कर भोजन पैकेट लेना उनके बस की बात नहीं है। पीलीभीत के कृष्ण कुमार भोजन पैकेट लिए बिना ही चले गए।
संयुक्त निदेशक कृषि राजेश कुमार ने बताया कि किसानों के लिए 40 टैंकर पानी मंगाया था। भोजन के 900 पैकेट बनवाए थे। कोशिश यही थी कि सभी को खाना मिल जाए। किसी को दिक्कत न हो।