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प्रसूता को अस्पताल से निकाला, सड़क किनारे तड़पती रही

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फरीदपुर। फरीदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर एक प्रसूता को इलाज किए बगैर ही निकाल दिया गया। सड़क किनारे वह आठ घंटे तक तड़पती रही। रात करीब साढ़े दस बजे परिजन उसे घर लेकर आए। घर वालों का आरोप है कि सीएचसी स्टाफ ने उनसे दो हजार रुपये मांग। पैसे न देने पर कुछ कागजों पर अंगूठा लगवाया और बाहर निकाल दिया। प्रसूता की हालात बिगड़ने लगी। बाद में परिजन उसे घर लेकर चले गए।
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भूरे खां गौटिया निवासी शौकीन साहब की बेटी फूल बानो को प्रसव पीड़ा के कारण सुबह करीब दस बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। आरोप है कि स्टाफ ने सुबह से ही उसे ठीक से नहीं देखा। वह शाम तक अस्पताल में भर्ती रही। परिजनों ने आरोप लगाए कि स्टाफ ने दो हजार रुपये की मांग की। आर्थिक तंगी होने के कारण वह पैसे नहीं दे पाए। फूल बानो एक भट्टे पर मजदूरी करती है। उसके पिता भी वहीं मजदूरी करते हैं। पति से अनबन चल रही है जिस कारण वह आर्थिक तंगी से जूझ रही है। पैसे न देने पर स्टाफ ने उसकी तबीयत बिगड़ने का बहाना बनाया। कह दिया कि उसका बीपी बढ़ गया है। अब वहां इलाज नहीं हो सकता। परिजन काफी देर तक इलाज के लिए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन स्टाफ का कलेजा नहीं पसीजा। कुछ कागजों पर अंगूठा लगवाया और उसे बाहर जाने को कह दिया। परिजन प्रसूता को लेकर तैसे जैसे स्टेशन रोड तक पहुंचे। यहां प्रसूता की हालत बिगड़ गई। उसे स्टेशन रोड पर फुटपाथ पर लिटा दिया। पैसे न होने के कारण घर वाले उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती नहीं करा पाए। रात करीब दस बजे परिजन उसे ई-रिक्शा से मोहल्ला भूरे खां गौटिया लेकर चले गए।

अभी तक मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। शिकायत आती है तो मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. विनीत कुमार शुक्ल, सीएमओ

एक माह पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
फरीदपुर। सीएचपी पर एक माह पूर्व भी इसी तरह का मामला सामने आया था। जिसकी जांच में डॉक्टर समेत स्टाफ दोषी पाया गया था। कार्रवाई न होने से स्टाफ ने फिर वैसी हरकत कर डाली। करीब एक माह पूर्व जेड गांव की एक प्रसूता को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए लाया गया था। पैसे न देने पर उसे अस्पताल से यह कहकर निकाल दिया था कि वह अपनी मर्जी से जा रही है। बाद में महिला को एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। शिकायत होने के बाद मामले की जांच कराई गई जो सही पाया गया। पिछले दिनों अधीक्षक डॉक्टर बासित अली द्वारा औचक निरीक्षण किया। स्टाफ रूप में नर्स बिस्तर लगाकर सो रही थी। फटाकर के बाद भी स्टाफ पर कोई असर नहीं पड़ा।
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