बरेली। होली के हुड़दंग में हरा, लाल, पीला, बैंगनी रंग कहीं आपको बदरंग न कर दें। इसलिए घर से बाहर निकलते समय खास सावधानी बरतनी जरूरी है। यह रंग केमिकल से बने होते हैं और आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचाने के साथ ही चर्म रोग भी पैदा कर सकते हैं। ऐसे में बेहतर है कि आप हर्बल गुलाल के साथ ही कुदरती फूल टेसू, कचनार, गूलर, गुलड़ल, गुलाब, गेंदा से तैयार खुशबूदार रंगाेें से होली खेलें। इससे तनाव भी दूर होगा और त्वचा संबंधी कोई नुकसान भी नहीं होगा।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अजय मोहन ने बताया कि रासायनिक रंगों में इंडस्ट्रियल केमिकल का प्रयोग किया जाता है। डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि बाजार में बिक रहे रंगों में उच्च क्षमता के केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है जो त्वचा में जलन पैदा करते हैं। कुछ रंगों में बारीक कण भी होते हैं, जिससे त्वचा छिल जाती है और धब्बा बन जाता है। बाजार में बिकने वाले करीब 90 फीसदी रंग रासायनिक हैं। होली पर इन रंगों का किसी भी तरह उपयोग करना घातक साबित हो सकता है।
होली पर जाने अनजाने लोग केमिकल युक्त रंग इस्तेमाल करते हैं लेकिन वे इसके दुष्परिणाम नहीं जानते। इसलिए हर्बल गुलाल या रंग ही प्रयोग करना चाहिए। टेसू के फूलों से तैयार रंग इस्तेमाल करने से मानसिक तनाव दूर होता है और त्वचा रोग दूर होेते हैं।- हकीम खुर्शीद मुराद
केमिकल युक्त रंगों के दुष्परिणामों से बचने के लिए नारियल का तेल शरीर पर लगाकर बाहर निकलें। अगर कोई खतरनाक केमिकल का रंग आप पर पड़ जाए और जलन होने लगे तो तुरंत गुनगुने पानी से साफ कर लेना चाहिए। फिर कोल्ड क्रीम या नारियल का तेल लगाएं। अधिक परेशानी पर डॉक्टर से संपर्क करें। - डॉ. बी कुमार
कलर केमिकल दुष्प्रभाव
काला लेड ऑक्साइड किडनी, मानसिक क्षमता पर प्रभाव
हरा कॉपर सल्फेट आंखों में सूजन, रोशनी जा सकती है
नीला प्रुसिओं ब्लू सूजन, त्वचा रोग
लाल मर्करी सल्फाइड खतरनाक चर्म रोग
बैंगनी क्रोमियम आयोडाइड एलर्जी व सांस रोग